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छह वर्ष की उम्र में मनस्वी ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

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मनस्वी - फोटो : GHAZIABAD City
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छह वर्ष की उम्र में मनस्वी ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
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गाजियाबाद। जिस उम्र में बेटियां गुड़ियों से खेलती हैं, उस उम्र में मनस्वी ने कई रिकॉर्ड बना दिए। छह वर्ष की उम्र में ही अपने नृत्य के जरिए पहला वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली मनस्वी ने नौ वर्ष की उम्र तक 190 ट्रॉफी, 150 मेडल्स और 1600 से अधिक प्रमाणपत्र हासिल कर लिए। अभी तक पूरे देश में लगभग 180 स्टेज शो कर चुकी हैं। मनस्वी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान गाजियाबाद की चैंपियन भी है और कई संस्थानों की ब्रांड एंबेसेडर भी हैं।
मनस्वी ने काफी छोटी उम्र में ही कथक नृत्य सीखना शुरू कर दिया और महज छह वर्ष की उम्र में मनस्वी ने 11 मिनट 47 सेकेंड में 1000 चक्कर लगा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। सातवें साल में कराटे में इंटरनेशनल ब्लैक बेल्ट हासिल किया। इसके अलावा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड, होप इंटरनेशनल वर्ल्ड रिकार्ड, स्वदेश इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड, नोबल वर्ल्ड रिकार्ड, ट्रिम्फ वर्ल्ड रिकार्ड ( दो अलग केटेगरी में) , इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकार्ड , वर्ल्ड बुक ऑफ रिकार्ड (यूके) में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। इंदिरापुरम की रहने वाली मनस्वी के पिता अरुण त्यागी एक बिजनेसमैन हैं और मां ममता त्यागी हासउस वाइफ हैं। ममता त्यागी ने बताया कि मुझे शौक था बेटी को क्लासिक डांस और गाना सिखाने का। जब इसको पांच साल की उम्र में कथक सिखाना शुरू किया तो छह महीने में इतना अच्छा डांस सीख लिया कि गुरुजी ने उसी समय भविष्यवाणी कर दी कि यह वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाएगी। छठवें वर्ष में उसने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद हमने देखा कि वह हर क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन कर रही है। कराटे में रिकॉर्ड है और दौड़ के लिए भी गिनीज बुक में उसका नाम भेजा गया है। इतना ही नहीं मनस्वी क्लास में भी हमेशा टाप करती है। क्लासिकल सिंगिंग, तबला प्लेयर, तैराक होने के साथ-साथ वह गणित में भी कैल्क्यूलेटर की तरह गणना करती है।
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दिव्यांग शिक्षिका नीतू दूसरों के लिए बनीं प्रेरणा
गाजियाबाद। मन में कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। जहां चाह, वहां राह के मुहावरे को हकीकत बनाया है डूंडाहेड़ा की रहने वाली नीतू सिंह ने। बचपन में ही पोलियो ग्रस्त होने के बावजूद नीतू के दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा था। नीतू ने पढ़ाई के साथ-साथ दिव्यांगता के बावजूद कई खेलों में भी ऊंचा मुकाम हासिल किया। नीतू ने इस वर्ष चार मार्च को स्टेट लेबल की शूटिंग प्रतियोगिता जीत कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बना ली है।
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डूंडाहेड़ा की रहने वाली नीतू ने पढ़ाई के बाद रजापुर ब्लाक की नेतगढ़ी प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षिका का पद हासिल किया। इसके बाद उन्होंने व्हीलचेयर बास्केटबाल खेलना शुरू किया। कुछ दिनों तक प्रैक्टिस के बाद नीतू ने शूटिंग में राष्ट्रीय स्तर पर खेलना शुरू कर दिया है। नीतू डूंडाहेड़ा से लगभग 30 किलोमीटर दूर तीन-चार सवारियां बदल कर पढ़ाने जाती हैं । स्कूल खत्म होते ही वह अपने प्रैक्टिस के लिए राजनगर शूटिंग एकेडमी जाती हैं। नीतू ने बताया कि कोरोना की वजह से कुछ राहत मिली थी कि रोजाना स्कूल नहीं जाना पड़ता था। इसलिए खेल का प्रैक्टिस करने का भी मौका मिला। अभी नोएडा में चल रहे राज्यस्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता में चार मार्च को जीत हासिल किया है इसके बाद वह नेशनल प्रतियोगिता में भाग लेंगी। एमए बीएड करने के बाद एलएलबी किया है। 2016 से बास्केटबाल की प्रैक्टिस करती रहीं और नेशनल तक पहुंची। अब नीतू ने व्हील चेयर बास्केटबाल को अपनी हॉबी के रूप में रखा है और वह शूटिंग प्रतियोगिता में भी ज्यादा ध्यान देती हैं। 2017 से शूटिंग की प्रैक्टिस कर रही हैं और इससे पहले भी नेशनल खेल चुकी हैं। नीतू को उम्मीद है कि इस बार वह राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी विजेता रहेंगी।
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