कोरोना का रिकवरी रेट पहुंचा सौ के करीब
गाजियाबाद। कई राज्यों में फिर से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है लेकिन गाजियाबाद में अभी राहत की स्थिति है। जिले में पिछले दस दिन में सिर्फ 64 संक्रमित मिले हैं। संक्रमित मरीजों में कमी आने से फरवरी में संक्रमण दर घटकर आधे फीसदी से भी कम हो गई है। रिकवरी रेट भी एक सौ के करीब पहुंच गया है। हालांकि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात व दिल्ली में कोरोना संक्रमण फिर से बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार ने एलर्ट जारी किया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में संक्रमण की दर आधे फीसदी से भी कम है, लेकिन अन्य प्रांतों से लोगों का आवागमन बढ़ने पर संक्रमण दर बढ़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सावधानी जरूरी है। पिछले कुछ दिनों से लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है। बाजार और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लोग न तो मास्क लगा रहे हैं, न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं।
जांच कराने से भी बच रहे लोग
शासन ने संक्रमण कम होने पर जिले में प्रतिदिन 5200 लोगों की जांच का निर्देश दिया है। 3700 एंटीजन और 1500 आरटी-पीसीआर जांच कराने का निर्देश है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग महज दो हजार से 23 सौ जांच प्रतिदिन कर पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि टेस्टिंग बढ़ाने का निर्देश मिला है, लेकिन कोई नया लक्ष्य नहीं दिया गया है। अधिकारी का कहना है कि शासन ने जो लक्ष्य पूर्व में दिया था, उसे ही पूरा करने का प्रयास किया जाता है। एक लैब टेक्नीशियन का कहना है कि अगरी किसी को कोरोना जांच के लिए कहा जाता है तो वह यह कहकर निकल जाता है कि कोई जरूरत नहीं है तो क्यों जांच कराई जाए। सिर्फ वही लोग जांच करा रहे हैं, जिनको उस कार्यालय या स्थान पर जाना हो जहां कोरोना की रिपोर्ट मांगी गई हो या युवाओं को किसी परीक्षा में शामिल होने के दौरान जरूरत पड़ रही हो।
सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि अब तक जिले में 7.83 लाख से अधिक लोगों की जा चुकी है। इनमें से 7.82 लाख से अधिक लोगों की रिपोर्ट आ चुकी है। इनमें से अबतक 26740 लोग संक्रमित हुए थे। वर्तमान में रिकवरी रेट 99.36 है, जबकि संक्रमण दर सिर्फ 0.34 फीसदी है। अब तक संक्रमितों के संपर्क में आने वाले 4.90 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई है। इससे संक्रमण दर में कमी आई है। अभी आने वाले तीन महीने तक सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी तरह की लापरवाही संक्रमण का कारण बन सकती है।