गुजरात से आए युवाओं द्वारा उपहार में दिए गए चरखे को चलाते राकेश टिकैत
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गांव-गांव जाकर विधायक और सांसदों द्वारा कृषि कानूनों के फायदे बताने की योजना के बारे में बात करने पर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि गांवों में कुछ लोग जबरदस्ती जाना चाहते हैं तो वह जाएं। लेकिन खाप चौधरी और किसान सभी इन बिलों को नहीं चाहते, ऐसे में कोई भी उन्हें तंग न करें। दिल्ली में किसान कमेटी सरकार से बातचीत कर रही थी, अब वहीं से ही बातचीत होगी।
उन्होंने फसल नष्ट कर रहे किसानों से अपील करते हुए कहा कि यह देश की धरोहर है, ऐसा बिल्कुल न करें। 20 अप्रैल के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। उधर, यूपी गेट पर राकेश टिकैत ने कोल्हू चलाकर गन्ने का रस निकाला। वहीं गुजरात से आए युवकों के साथ चरखे से सूत भी काता।
सुबह करीब सात बजे मुजफ्फरनगर के सिसौली से टिकैत परिवार का पुराना कोल्हू यूपी गेट आंदोलन स्थल पर लगाया गया। इसे देखने के लिए वहां किसानों की काफी भीड़ जुट गई। राकेश टिकैत ने खुद किसानों के साथ बैठकर गन्ने का रस निकाला। उधर, मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि हरियाणा और यूपी में चार किसानों द्वारा फसल नष्ट करने के मामले सामने आए हैं। उन सभी से अपील की कि वह अभी ऐसा ना करें, अप्रैल माह में फसल काटने का समय आएगा।
चरखा चलाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को किया याद :
यूपी गेट पर गुजरात से युवाओं की एक टोली चरखा लेकर पहुंची। टोली के सदस्यों ने मीडिया सेंटर के अंदर राकेश टिकैत से मुलाकात की और उन्हें चरखा चलाकर सूत कातने का तरीका भी बताया। इस पर राकेश टिकैत ने कहा कि चरखा चलाते हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की याद आई। इस बीच उन्होंने लोगों को स्वदेशी कपड़े पहनने का भी संदेश दिया। इस दौरान युवाओं की टोली ने राकेश टिकैत को 2 अक्तूबर को चंपारण से पोरबंदर तक मार्च निकालने का भी प्रस्ताव दिया। इस पर राकेश टिकैत ने ट्रैक्टरों से मार्च निकालने पर विचार करने के लिए कहा।
यूपी गेट पर ‘किसान की अदालत’
यूपी गेट पर आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों को विभिन्न जगहों से कानूनी नोटिस मिल रहे हैं। ऐसे में संयुक्त किसान मोर्चा ने एलान किया था कि किसानों को मिल रहे नोटिस पर उनकी लड़ाई मोर्चा की तरफ से लड़ी जाएगी। इसके लिए यूपी गेट पर रविवार को ‘किसान की अदालत’ नाम से कानूनी सहायता केंद्र तैयार कर दिया गया। यहां दिनभर में 50 से अधिक किसानों ने संपर्क कर वकीलों को अपने नोटिस जमा कराए। एडवोकेट ने बताया कि नोटिस के लिए सिर्फ 100 रुपये फीस रखी गई है क्योंकि इसमें प्रिंट और अन्य कागजात लगने होते हैं।