इंजीनियर ने जांच कर खुद की दे दी क्लीनचिट
गाजियाबाद। वार्ड-46 के दुहाई श्मशान घाट में नगर निगम के टेंडर डलने की अंतिम तिथि से पहले मिट्टी भराव का मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले में घिरने के बाद नगर निगम की ओर से मुख्य अभियंता को सौंपी गई जांच सवालों में घिर गई है। मुख्य अभियंता मुईनुद्दीन खान ने अपनी जांच में दुहाई श्मशान घाट के पास निर्माणाधीन स्थान पर पशुपतिनाथ मंदिर समिति की ओर से मिट्टी डाले जाने की बात कहकर निगम को क्लीन चिट दे दी। दूसरी ओर अभियंत्रण अनुभाग पर आरोप के बावजूद मुख्य अभियंता को जांच सौंपने और उनके द्वारा खुद को क्लीन चिट देने पर भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल ने गंभीर सवाल उठाए हैं।
भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल का कहना है कि मामले की जांच जीडीए, पीडब्ल्यूडी या फिर मंडलस्तरीय एसआईटी से कराई जानी चाहिए। जिस विभाग पर भ्रष्टाचार का आरोप है, उसे ही जांच का जिम्मा सौंप दिया गया। खुद दोषी होने के बावजूद मामला मंदिर समिति पर डालकर खुद को क्लीन चिट दे दी गई। दुहाई श्मशान घाट में 5040 क्यूबिक मीटर मिट्टी का भराव हुआ है। ऐसे में टेंडर खुलने से पहले ही अगर श्मशान घाट में मिट्टी के भराव का काम हो गया है तो निगम को पशुपतिनाथ मंदिर समिति को 16 लाख का भुगतान करना चाहिए।
उन्होंने दिन की जगह रात में चोरी छिपे मिट्टी डाले जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मंदिर समिति को मिट्टी डालनी ही थी तो रात के अंधेरे की जगह दिन में क्यों नहीं डाली गई। और निर्माणाधीन मंदिर समिति के पास इतनी मिट्टी और उसे डलवाने का फंड कहां से आया। अगर निगम की जगह दूसरे विभाग या एजेंसी जांच करती है तो मिट्टी भराव में हुआ खेल फौरन पकड़ में आ जाएगा। ऐसे में दोषी अनुभाग को जांच सौंपने व उसके खुद को पाक साफ करार देने का सही नहीं माना जा सकता है।
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जांच में मुख्य अभियंता ने दी यह सफाई
दुहाई श्मशान घाट मिट्टी भराव मामले की जांच करने वाले निगम मुख्य अभियंता मुईनुद्दीन खान ने अपनी जांच में कहा है कि स्थलीय जांच में श्मशान घाट के छोटे द्वार के सामने मिट्टी डालने की बात पता चली है। यह मिट्टी श्मशान घाट के सामने निर्माणाधीन पशुपतिनाथ महादेव मंदिर की समिति द्वारा डाली गई है। जिसका नगर निगम से कोई लेना देना नहीं है।
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मुरादनगर हादसे के दोषी अजय त्यागी ने बनाई श्मशान घाट की बाउंड्रीवॉल
दुहाई श्मशान घाट में टेंडर डलने से पहले मिट्टी भराव का मामले में और खुलासे सामने आ रहे हैं। वार्ड-46 के स्थानीय पार्षद अजय चौधरी का आरोप है कि दुहाई श्मशान घाट की बाउंड्रीवॉल का निर्माण एक साल पहले किया गया था। दीवार बनाने का ठेका मुरादनगर श्मशान घाट हादसे के आरोपी अजय त्यागी को मिला था। दीवार के निर्माण के खेल करते हुए नीचे चार फीट मिट्टी की चिनाई (गारा) हुई, और फिर उसके ऊपर पांच से छह फीट सीमेंट की दीवार खड़ी की गई। मामले की जब उन्हें सूचना मिली तो इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर करने के साथ ही संबंधित नगर निगम जेई से की गई। लेकिन उस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में दुहाई श्मशान घाट की दीवार कभी भी गिरने से बड़ा हादसा हो सकता है। दूसरी ओर श्मशान घाट में टेंडर से पहले मिट्टी डाले जाने के मामले में उन्होंने निगम अधिकारियों की ठेकेदारों से मिलीभगत बताया। उन्होंने मंदिर समिति द्वारा मिट्टी डलवाए जाने की निगम अधिकारियों के दावे को सरासर झूठ बताया।