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कोरोना का दिखा डर, स्कूलों में पहले दिन कम पहुंचे बच्चे

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एमबी गर्ल्स स्कूल में बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग करते हुए कर्मचारी।
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कोरोना का दिखा डर, स्कूलों में पहले दिन कम पहुंचे बच्चे
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गाजियाबाद। जिले में 11 माह बाद बुधवार को कक्षा छह से आठ तक के स्कूल खोले गए लेकिन अभिभावकों में कोरोना का डर साफ दिखाई दिया। इसीलिए निजी स्कूलों में बहुत कम बच्चे पहुंचे। वहीं, सरकारी स्कूलों में उपस्थिति ठीक रही। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में करीब 40 प्रतिशत तक छात्र-छात्राएं पहुंचे। शहरी क्षेत्र के स्कूलों में उपस्थिति कम रही। सभी स्कूलों ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग और अच्छी साफ-सफाई की व्यवस्था की। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में चिंतित नजर आए। अमर उजाला की टीम ने स्कूल खुलने के पहले दिन कई विद्यालयों का भ्रमण किया। प्रस्तुत है स्कूलों की लाइव रिपोर्ट।
9:45 बजे : एमबी गर्ल्स इंटर कॉलेज
विद्यालय स्टाफ छात्राओं की थर्मल स्क्रीनिंग कर रहा था। सभी को सैनिटाइज कराया जा रहा था, जो छात्राएं मास्क लेकर नहीं आई थीं। उन्हें मास्क उपलब्ध कराए गए। बुधवार को केवल कक्षा आठ की छात्राओं को बुलाया गया। 250 छात्राओं में से केवल 85 छात्राएं ही विद्यालय पहुंचीं।
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10:30 बजे : शंभु दयाल इंटर कॉलेज
विद्यालय में इंटरनल परीक्षाएं संचालित हो रही थीं। यहां कक्षा छह से आठ तक के छात्रों को नहीं बुलाया गया था। विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि अभी विद्यालय की आंतरिक परीक्षाएं चल रही हैं। जब तक परीक्षाएं संचालित होंगी तब तक अन्य कक्षाओं को नहीं बुलाया जाएगा। परीक्षा समाप्त होने के बाद ही छात्र आएंगे।
1:30 बजे : डीडीपीएस, सिल्वर साइन
देहरादून पब्लिक स्कूल अशोक नगर और सिल्वर साइन स्कूल में कक्षा छह से आठ तक के बच्चे पहुंचे। देहरादून की स्कूल में करीब 35 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति रही। जबकि सिल्वर साइन स्कूल में इससे कम छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही। स्कूल प्रशासन ने बताया कि जिस तरह से बच्चे आने शुरू हुए हैं। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ जाएगी।
इन स्कूलों में नहीं पहुंचे छात्र
अमर उजाला की टीम ने इस समय के बीच जीटी रोड स्थिति इंग्राम स्कूल, सिल्वर लाइन स्कूल नेहरू नगर, होली चाइल्ड स्कूल, गाजियाबाद पब्लिक स्कूल का भ्रमण किया। इन स्कूलों में भी कक्षा छह से आठ तक के बच्चे नहीं पहुंचे। स्कूलों ने बच्चों के लिए सभी तैयारियां की हुई थीं। जिससे किसी भी बच्चे को दिक्कत न हो।
संख्या बढ़ी तो रोल नंबर के आधार बुलाएंगे
निजी स्कूलों ने कहा है कि छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ी तो उन्हें रोल नंबर के आधार पर बुलाना शुरू किया जाएगा, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके। बच्चे कोरोना गाइड लाइन का पालन भी कर सकें। ज्यादा भीड़ होने पर बच्चे नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे। इसलिए सेक्शन और रोल नंबर के आधार पर छात्र-छात्राओं का स्कूल बुलाने के लिए चयन किया जाएगा।
स्कूल नहीं आने वाले बच्चों के लिए चलेंगी ऑनलाइन कक्षाएं
जिले के निजी स्कूलों ने व्यवस्था की है कि जो बच्चे स्कूल नहीं आएंगे। उनकी पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जाएंगी। दिन में स्कूल में कक्षाएं चलेंगी। शाम को स्कूल से दूर रहने वाले बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं दी जाएंगी, जिससे छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। क्योंकि कोरोना संक्रमण को लेकर ज्यादातर अभिभावक डरे हुए हैं और बच्चें को स्कूल नहीं भेज रहे हैं।
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15 फरवरी से बच्चों को बुलाने की तैयारी
काफी संख्या में शहर के निजी स्कूलों ने 15 फरवरी से छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाने की तैयार की है। जबकि कुछ स्कूल संचालकों का मामना है कि बच्चे कोरोना के डर के कारण नए सत्र से ही आना शुरू करेंगे, लेकिन वह बच्चों के लिए पूरी तैयारी करके रखेंगे।
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