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व्यावसायिक भवनों पर भी बढ़ेगा टैक्स का बोझ

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व्यावसायिक भवनों पर भी बढ़ेगा टैक्स का बोझ
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गाजियाबाद। नगर निगम की नई हाउस टैक्स पॉलिसी के लागू होने के बाद आवासीय से ज्यादा व्यावसायिक भवन मालिकों पर टैक्स का बोझ बढ़ेगा। किसी क्षेत्र में अगर आवासीय संपत्ति कर दोगुना होगा तो उस क्षेत्र में बनीं दुकानों, होटल, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल, फैक्टरियों पर टैक्स करीब चार से छह गुना तक बढ़ जाएगा। निगम पार्षदों का कहना है कि एक साथ टैक्स का इतना बोझ बढ़ाना न तो तर्कसंगत है और न ही वह बढ़ने देंगे। उधर, नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि नई पॉलिसी से मलिन बस्तियों समेत कम सुविधाओं वाली कई कॉलोनियों में टैक्स कम हो जाएगा।
दरअसल, 2013 में उत्तर प्रदेश में कॉमर्शियल भवनों पर संपत्ति कर का निर्धारण करने के लिए नई पॉलिसी बनाई गई थी। इसमें व्यावसायिक भवनों पर टैक्स लगाने के लिए आवासीय दरों को आधार माना गया था। इस पॉलिसी के मुताबिक जिम, थियेटर, सिनेमाहाल आदि पर आवासीय दरों का दोगुना, क्लीनिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, नर्सिंगहोम, मेडिकल स्टोर, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी पर तीन गुना, दुकानें, बैंक, होटल, कॉमर्शियल कांप्लेक्स पर पांच गुना टैक्स लगाया गया है। ऐसे में आवासीय दरों में अगर दोगुना की बढ़ोतरी की गई तो इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर टैक्स का बोझ चार से छह गुना बढ़ सकता है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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कई कॉलोनियों में कम होंगी दरें : नगरायुक्त
नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर का कहना है कि नई पॉलिसी से टैक्स का सरलीकरण होगा। कम सुविधाओं वाली कॉलोनियों को राजनगर, कविनगर जैसी पॉश कॉलोनियों के बराबर टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इस पॉलिसी के लागू हो जाने के बाद कई कॉलोनियों में टैक्स की दरें पहले से कम हो जाएंगी। उनका कहना है कि यह पॉलिसी पूरे प्रदेश में लागू होनी है और इसकी मॉनीटरिंग भी शासन के स्तर से की जा रही है। पॉलिसी का विज्ञापन जारी कर उस पर आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं, 20 फरवरी तक मिलने वाली आपत्तियों पर सुनवाई की जाएगी। इस दौरान आपत्तियों और सुझावों के आधार पर पॉलिसी में संशोधन भी किया जा सकता है।
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