मकान की निर्माणाधीन छत गिरी मां-बेटे की मौत, 7 लोग घायल
मुरादनगर। निर्माणाधीन छत गिरने से सोमवार को मुरादनगर में रावली रोड स्थित वाल्मीकि कॉलोनी के एक मकान में नौ लोग मलबे में दब गए। इसमें मां-बेटे की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हैं। घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने बच्चे समेत आठ लोगों को मलबे से निकाल लिया। इसमें डेढ़ वर्ष के बच्चे की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, मलबे में दबी महिला के शव को एनडीआरएफ की टीम घटना के करीब ढाई घंटे के बाद निकाल सकी। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब मकान की छत ठीक करने का काम चल रहा था।
पुलिस ने बताया है कि वाल्मीकि कॉलोनी में महिपाल सिंह का परिवार रहता है। परिवार में पत्नी माया, बेटा विपिन, मनी, पुत्रवधू निशा (30), पोता (3), जय (6) और डेढ़ वर्ष बच्चा है। माया नगरपलिका में सफाईकर्मी है, उसका दो मंजिला मकान बना हुआ है। फ्लोर और पहली मंजिल पर सिल्ली गाटर पड़ी है। पहली मंजिल की छत खराब होने के कारण उसको ठीक करने का काम चल रहा था। सोमवार दोपहर करीब 1:15 बजे माया का भाई मिस्त्री प्रदीप कुमार, बेलदार दीपक के साथ छत पर काम कर रहा था। बताया गया है कि परिवार के सदस्य माया, विपिन, निशा, मनी, तेज, रफ्तार, जय महिपाल नीचे कमरे में बैठे थे। इसी बीच पहली मंजिल (सबसे ऊपर) की छत फ्लोर पर गिरी, जिसका दबाव पड़ने पर ग्राउंड फ्लोर (नीचे की छत) भी आ गिरी। इससे कमरे में बैठे सभी लोग दब गए। छत गिरने के बाद मची चीख-पुकार सुनकर कॉलोनी के लोग मौके पर पहुंचे और छत का मलबा हटाना शुरू किया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल और एनडीआर की टीम भी मौके पर पहुंची। कुछ ही देर के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन कर दिया। हादसे में निशा और उसके बेटे (मां-बेटे) की मौत हो गई। घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सीओ सदर महिपाल सिंह ने बताया कि हादसे में निशा और उसके डेढ़ साल के बेटे रफ्तार की मौत हो गई। एसएचओ अमित कुमार ने बताया कि पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिये है।
कॉलोनी के लोगों की सर्तकता से बची बाकी की जान
छत गिरी तो कॉलोनी के लोगों पहुंचे और जल्दी-जल्दी छत का मलबा हटाना शुरू कर दिया। आधे घंटे में लोगों ने महिपाल, माया, विपिन, मनी, जय, तेज, रफ्तार, मिस्त्री प्रदीप व बेलदार दीपक को निकालकर स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। समय रहते कॉलोनी के लोगों ने समझदारी से काम लिया और मलबे में दबे सभी लोगों को निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया। जिसके कारण उनकी जान बच गई।
एनडीआरएफ टीम ने चलाया 30 मिनट रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना पर एनडीआरएफ के सहायक कमांडेट श्रीनिवास अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ डॉग हनी और मैक्स भी थे। श्रीनिवास ने बताया कि 30 मिनट के रेस्क्यू कर छत के मलबे में दबी निशा के शव को बाहर निकाला गया।
पड़ोसी के मकान की भी छत टूटी
महिपाल के मकान की निर्माणाधीन छत गिरने से पड़ोसी रोहताश की भी छत टूट गई, हादसे के समय परिवार के लोग दूसरे कमरे में थे, एक ओर बड़ा हादसा होने से बच गया। वहीं, हादसे में मां-बेटे की मौत से कॉलोनी में लोगों ने चूल्हे नहीं जले। कॉलोनी में मातम छाया हुआ है।
असपा ने की पीड़ित परिवार के लिए मदद की मांग
आजाद समाज पार्टी के संस्थापक सदस्य संजय जाटव ने अस्पताल में घायलों का हाल जाना और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार के लिए मदद की मांग की।