साइबर सेल गाजियाबाद और साहिबाबाद पुलिस ने डीएलएफ कॉलोनी के एक फ्लैट में लोन दिलाने के नाम पर एक हजार रुपये से अधिक लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले कॉलसेंटर का भंड़ाफोड़ किया है। पुलिस ने मौके से 15 युवतियों और 3 युवकों को गिरफ्तार कर चार मोबाइल, दस डेटा रजिस्टर, पांच एटीएम, पांच सिम बरामद किए हैं। सीओ साइबर सेल को गुमनाम चिट्ठी से इसकी शिकायत प्राप्त हुई थी।
सीओ साइबर सेल अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि 11 जून को उनके नाम पर एक गुमनाम पत्र आया था। इसमें साहिबाबाद के डीएलएफ कॉलोनी स्थित एक फ्लैट में लोन दिलाने के नाम पर ठगी का कॉल सेंटर चलने की सूचना दी गई थी। साइबर सेल की टीम और साहिबाबाद थाने की टीम ने मौके पर पहुंचकर छापा मारा। पुलिस को देखकर सरगना सावेज निवासी कैला भट्टा मौके से फरार हो गया। जबकि पुलिस ने मौके से 15 युवतियों और तीन युवकों आकाश निवासी ताहिरपुर सराय दिलशाद गार्डन, पंकज और विशाल निवासी नंदनगरी दिल्ली को पकड़ लिया।
पुलिस ने चार मोबाइल, दस डेटा रजिस्टर, पांच एटीएम कार्ड, पांच सिम कार्ड, एक रजिस्टर बरामद किया है। पकड़े गए अधिकांश आरोपी ग्रेजुएट और इंटर पास हैं। सीओ ने बताया कि करीब आठ माह से यहां पर किराए के फ्लैट में कॉल सेंटर चल रहा था। लोन और इंश्योरेंस के नाम पर ठगी कर रहे थे। मौके से जो दस रजिस्टर बरामद हुए हैं। जिन लोगों के साथ ठगी हुई उनका डेटा लिखा हुआ है। एक हजार से अधिक लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर चुके हैं।
प्रतिदिन 4500 कॉल का था टारगेट
सीओ अभय मिश्रा ने बताया कि जांच में सामने आया है कि एक युवती को प्रतिदिन 300 कॉल करने का लक्ष्य दिया गया था। 15 युवतियों को प्रतिदिन 4500 कॉल करनी थी। इसके बाद यदि कोई व्यक्ति इनके झांसे में आता था तो तीनों युवक खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर उनको प्लान समझाकर खाते में रुपये ट्रांसफर कराते थे। तीनों युवकों को दस प्रतिशत के हिसाब से मिलता था। जबकि एक युवती जो हेड थी उसे 21 हजार रुपये और अन्य को 12 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे। जिस नंबर पर कॉल करने के बाद कोई पीड़ित झांसे में आता था। इसके बाद के नंबरों पर ही शातिर कॉल करने लगते थे।
फर्जी आईडी पर नंबर और खाते, साइबर सेल कर रही जांच
साइबर सेल के दरोगा सुमित कुमार ने बताया कि शातिर ठगों ने फर्जी दस्तावेज लगाकर खाते खुलवाए हुए थे। इसी में लोगों से झांसे में लेकर रुपये डलवाते थे। व्हाट्सएप पर ही लोगों से दस्तावेज भी मंगाते थे। मोबाइल और सिमकार्ड भी फर्जी दस्तावेज पर ही लिए गए थे। झांसे में आने वाले व्यक्ति से 25 सौ रुपये प्रोसेसिंग फी और प्लान का दस प्रतिशत खाते में डलवाते थे। पुलिस खातों को जांच कर रही है। इससे लेनदेन के बारे में पता चल सके। साथ ही फरार आरोपी सरगना की तलाश कर रही है। जिससे अन्य जानकारी मिल सकेगी।