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उपेक्षा के शिकार गाजियाबाद को मिले विशेष फंड

Sun, 29 Jan 2017 12:48 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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बजट - फोटो : demo pic
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केंद्र सरकार जल्द ही आम बजट पेश करने वाली है। बजट से शहरवासियों को काफी उम्मीदें हैं। इस बार यह उम्मीदें इसलिए भी ज्यादा हैं कि सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले एनसीआर के प्रमुख शहर गाजियाबाद की बीते वर्षों में उपेक्षा हुई है। बिना केंद्र सरकार की मदद के इस शहर को मेट्रो या स्मार्ट सिटी बनाना संभव नहीं।
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शहर का इतना विस्तार हो चुका है कि यहां सड़क, सीवर, पानी की योजनाओं में भी केंद्र सरकार की मदद जरूरी हो गई है। आगामी बजट में गाजियाबाद समेत यूपी के कई शहरों को विशेष फंड मिलने की उम्मीद है।

यहां के जनप्रतिनिधियों, जनता को ही नहीं बल्कि उद्यमियों और व्यापारी वर्ग को भी आस बंधी है। उद्यमी और व्यापारी वर्ग सबसे ज्यादा टैक्स की मार से त्रस्त हैं। शहर वासियों को लगता है कि शायद इस बार प्रधानमंत्री मोदी की पोटली से ऐसा कुछ खास निकल जाए, जिससे उनकी समस्याएं खत्म हो जाएं।
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बजट में लोगों की पहली डिमांड है कि सरकार इनकम टैक्स में रिबेट दे। महंगाई से जूझ रही पब्लिक को यदि रिबेट मिलती है तो उनकी बचत बढ़ेगी। हालांकि चुनावी समर के कारण माना जा रहा है कि सरकार लुभावनी घोषणाएं कम ही करेगी।

बोले शहरवासी
- टैक्स की मार इतनी है कि व्यापार करना मुश्किल हो रहा है। सरकार पारदर्शिता लाते हुए टैक्स कम करे। जीएसटी में प्रस्तावित टैक्स दरों को कम करे और सरकारी भ्रष्टाचार को खत्म करे, तभी व्यापार बढ़ेगा। 
- अशोक चावला, महामंत्री, महानगर उद्योग व्यापार मंडल

- लघु और कुटीर उद्योग बढ़ेंगे तभी बेरोजगारी दूर होगी। बजट में ऐसे उद्योगों के लिए विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए। साथ ही बैंक भी अपने इंटरेस्ट रेट को कम करें, जिससे छोटे उद्यमियों को भी फायदा हो सके।  
- अनिल गुप्ता, महासचिव गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन

- सरकार बजट में कैंसर, टीबी और अन्य महंगे इलाज को सस्ता करे। दवाएं सस्ती होंगी तो करोड़ों लोगों को फायदा होगा। टैक्स कम होगा तो दवा कारोबार भी बढ़ेगा। साथ ही इनकम टैक्स में पांच लाख तक रिबेट मिले। 
- राजीव त्यागी, कोषाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

- छोटे उद्योगों को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि सरकारी खरीद में इनकी हिस्सेदारी बढ़ाई जाए। बजट में ऐसी नीतियां बननी चाहिए। साथ ही नए उद्योगों को टैक्स में कम से कम पांच वर्ष तक छूट मिले। वर्तमान में इंडस्ट्री पर 33 प्रतिशत टैक्स लगता है। 
- नीरज सिंघल, प्रदेश उपाध्यक्ष, आईआईए

 - बजट में एनसीआर के शहरों के इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए विशेष फंड दिया जाना चाहिए। दिल्ली के नजदीक होने के बावजूद गाजियाबाद इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काफी पिछड़ा हुआ है। इसकी वजह से लोग नोएडा-गुड़गांव की तरफ जा रहे हैं। - अंकित शर्मा, नौकरीपेशा

 - बजट में केंद्र सरकार का प्रदेश सरकार से समन्वय दिखना चाहिए। राजनीतिक दलों के मतभेदों का असर बजट पर नहीं आना चाहिए। एनसीआर को डेवलप करने के लिए विशेष पैकेज दिया जाना चाहिए। 
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- अमित तोमर, नौकरीपेशा 
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