मीटर रीडरों के फर्जीवाड़े से बढ़ी आरडीएफ कनेक्शनों की संख्या
गाजियाबाद। ऊर्जा निगम में मीटर रीडरों के फर्जीवाड़े से आरडीएफ (रीडिंग डिफेक्टिव) कनेक्शनों की संख्या बढ़ रही है। इसकी वजह से न सिर्फ उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि ऊर्जा निगम के अधिकारियों को भी बिल ठीक कराने में मशक्कत करनी पड़ रही है। मुरादनगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में विद्युत उपभोक्ताओं के बिल घर पर न जाने की बजाय फर्जी रीडिंग दर्ज करके बना दिए जाने से दिक्कतें बढ़ी हैं। ऊर्जा निगम के अधिकारियों की जांच में भी इसका खुलासा हुआ है।
मेरठ के रहने वाले शिव कुमार शर्मा की शिकायत पर मामले की जांच कराई गई थी। आरोप था कि बिजली मीटर की रीडिंग लेने रीडरों को घर पर जाकर रीडिंग लेनी चाहिए, लेकिन बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के बिल बिना मीटर रीडिंग लिए बना दिए गए हैं। अधिकांश उपभोक्ताओं के मीटर की रीडिंग ज्यादा दर्शाकर उनसे बिल वसूल लिया गया है, जबकि ककई उपभोक्ताओं की मीटिर रीडिंग कम दर्शा दी गई है। फर्जी रीडिंग दर्ज कर बिल बना दिए जाने की वजह से ऐसे कनेक्शन आरडीएफ (रीडिंग डिफेक्टिव) श्रेणी में पहुंच गए हैं। बिलों की इन गड़बड़ियों को ठीक कराने के लिए उपभोक्ताओं को ऊर्जा निगम कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पांच गुना तक बढ़ गई संख्या
अक्तूबर 2022 से दिसंबर 2022 तक आरडीएफ यानी बिलों में गड़बड़ी वाले कनेक्शनों की संख्या पांच गुना तक बढ़ गई। जांच में पाया गया कि अक्तूबर में ऐसे कनेक्शनों की संख्या 490 थी, नवंबर में यह बढ़कर 897 और दिसंबर में 2684 तक पहुंच गई।
अधिकारी बोले
गलत बिल बनने की शिकायत मिली थी। ऐसे बिलों को ठीक कराकर बिल बनाने वाली कंपनी के अनुबंध के आधार पर उसे दिए जाने वाले फंड में से कटौती कर ली है। उपभोक्ताओं की समस्याओं के समाधान के लिए बीते शुक्रवार को मेगा कैंप भी लगाया गया था। जल्द ही ऐसे कैंप ग्रामीण क्षेत्र में लगाए जाएंगे। - वीके आर्य, अधीक्षण अभियंता (ग्रामीण), ऊर्जा निगम