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नाटक का रोल तय करके ट्रेनों में करते थे टप्पेबाजी

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नाटक का रोल तय करके ट्रेनों में करते थे टप्पेबाजी
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गाजियाबाद। नाटकीय अंदाज में ट्रेनों में टप्पेबाजी कर लोगों से ठगी और चोरी करने वाले दो बदमाशों को जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने गिरफ्तार किया है। यह टप्पेबाज अपना-अपना रोल वारदात से पहले तय कर लेते थे। इनमें से एक यात्रियों के साथ सह यात्री बनकर उनका विश्वास जीत लेता था और दूसरा साथी अपने मालिक के उत्पीड़न से तंग नौकर बनकर चुराई गई नोटों की गड्डी और तिजोरी को दिखाकर टप्पेबाजी करता था।
सीओ जीआरपी सुदेश गुप्ता ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि पकड़े गए आरोपी इरफान उर्फ हाउ और शेरखान उर्फ शेरा निवासी जेजे कॉलोनी दिल्ली हैं। यहां दोनों किराए पर रहते हैं। शेरखान मूलरूप से फर्रुखाबाद और इरफान गोंडा का रहने वाला है। उन्होंने बताया कि दोनों टप्पेबाजों को पुराना रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से चोरी के मोबाइल, जूलरी और नकदी मिली है। नशे के आदी शेरा दर्जी का काम और इरफान बेलदारी करता था। बाद में दोनों ने काम छोड़कर अपने अन्य साथियों के साथ ट्रेनों में चोरी और टप्पेबाजी का काम शुरू कर दिया। दोनों अब तक करीब 50 से ज्यादा वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।
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ऐसे करते थे वारदात
जीआरपी प्रभारी अनुज मलिक का कहना है कि दोनों टप्पेबाजों ने पूछताछ में बताया कि शेरा व इरफान लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करते थे और इसी दौरान वह रेकी कर ऐसे यात्री को तलाश लेते थे, जिसे आसानी से ठगा जा सके। शेरा सहयात्री बनकर उसके पास खड़ा हो जाता था। इसी दौरान इरफान अनजान बनकर वहां आता था। वह बताता था कि वह अपने मालिक के उत्पीड़न से परेशान होकर भाग आया है और साथ में उसकी तिजोरी चुराकर ले आया है। वह तिजोरी को खोलकर दिखाता था, उसमें रुमाल में बंधी नोटों की ऐसी गड्डी होती थी जिसमें ऊपर और नीचे 500 के दो नोट होते थे और बीच में नोट के आकार के कागज। इस तिजोरी में नकली जूलरी भी रखी जाती थी। इरफान कहता था कि उसके पास टिकट के पैसे नहीं हैं, वह तिजोरी ले ले और इसके बदले में उसे कुछ रकम दे दें, ताकि वह घर पहुंच सके। सहयात्री बना इरफान का साथी शेरा पास में खड़े यात्री को झांसे में लेने के लिए इरफान को 4-5 हजार रुपये दे देता था। इसके बाद अपने सहयात्री से भी रकम देने के लिए कहता था और तिजोरी में रखी रकम व ज्वेलरी को आपस में बांट लेने का झांसा देता था। उसके झांसे में आकर यात्री भी रकम दे देते थे। तब इरफान अपने साथी शेरा से स्टेशन से बाहर जाने का रास्ता बताने का बहाना बनाकर साथ ले आता था। दोनों मिलकर यात्री को झांसा देकर रकम ठग लेते थे और फरार हो जाते थे। ठगी का पता यात्री को उनके जाने के बाद चलता था।
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