इंजीनियरिंग कॉलेजों में नहीं भर रही सीट, बंदी की नौबत
गाजियाबाद। डॉ. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के साथ सीसीएसयू से संबद्ध इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों में सीटें नहीं भरने से अलग-अलग विषयों से जुड़ी ब्रांच बंद करने की नौबत आ गई है। इंजीनियरिंग कॉलेजों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति बीटेक में कोर ब्रांच मानी जाने वाली मेकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल में हैं। कॉलेजों ने कई कोर ब्रांच सरेंडर करने के साथ सीटें आधे से भी कम कर दी हैं। कई कॉलेजों ने ब्रांच बंद करने के लिए एकेटीयू में आवेदन किया है। साहिबाबाद के 22 साल पुराने इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज की ओर से बंदी के आवेदन के पीछे सीटें नहीं भरना भी एक कारण है।
जनपद में एकेटीयू और सीसीएसयू से संबद्ध पांच कॉलेजों में ताला लग चुका है। इनमें मोदीनगर का केएनजीडी इंस्टीट्यूट, आरसीसीवी टेक्निकल इंस्टीट्यूट, डीजे इंजीनियरिंग कॉलेज, ट्राइडेंट इंस्टीट्यूट और एडवांस इंस्टीट्यूट शामिल हैं। इनमें नया नाम इंद्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज का शामिल हुआ है। बीते साल भी कंप्यूटर साइंस और आईटी को छोड़कर बाकी ब्रांच में दाखिले का प्रतिशत 50 फीसदी के आसपास रहा। ऐसे में विद्यार्थियों की लगातार घटती संख्या या फिर उनके दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन करने से समस्या बढ़ी है।
सीएस-आईटी की नई एआई, डेटा साइंस, आईओटी में रुझान:
इंजीनियरिंग कॉलेजों में जहां एक ओर मेकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल ब्रांच में विद्यार्थियों का रुझान कम होने के साथ कंप्यूटर साइंस व आईटी की नई ब्रांच में बढ़ा है। बीते दो सालों में महानगर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीएस आईटी के अलावा बीटेक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस व मशीन लर्निग, डाटा साइंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) सहित अन्य नई ब्रांच शुरू हुई हैं। ऐसे में इन ब्रांच में दाखिले शत प्रतिशत हैं। एबीईएस आईटी इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. एमके झा ने बताया कि बीते कई सालों से प्रवेश न होने के कारण मेकेनिकल और सिविल ब्रांच बंद करने का निर्णय लिया गया। सीएस में नई ब्रांच एआई, डेटा साइंस व आईओटी में दाखिले केलिए विद्यार्थी आगे आ रहे हैं।
इन कॉलेजों में बीटेक की यह ब्रांच बंद या फिर सीटें घटीं:
कॉलेज:
1. एबीईएसआईटी: मैकेनिकल और सिविल ब्रांच हुई बंद
2. एबीईएस ईसी: सिविल ब्रांच हुई बंद
3. आईएमएस ईसी: इलेक्ट्रिकल और सिविल ब्रांच बंद, मेकेनिकल में 120 से रह गईं 30 सीट
4. सुंदरदीप इंस्टीट्यूट: इलेक्ट्रिकल ब्रांच बंद करने को आवेदन
5. आरकेजीआईटी: मेकेनिकल में 240 से 60, सिविल में 120 से 60 व इलेक्ट्रिकल में 60 सीटें हुई
6. एचआरआईटी: मेकेनिकल में 240 से घटकर 120 और सिविल में 120 से 60 हुई।
(नोट: अधिकांश इंजीनियरिंग कॉलेजों में मेकेनिकल, सिविल और इलेक्ट्रिकल की सीटें 50 से 75 फीसदी घटीं)