ईंधन महंगा होने से उद्योगों ने किया पीएनजी से किनारा
गाजियाबाद। पीएनजी व एलएनजी का खर्च अधिक होने की वजह से ज्यादातर उद्योगों ने इनसे किनारा कर लिया है। पीएनजी पर जाने के बाद करीब 95 प्रतिशत उद्योग वापस परंपरागत ईंधन और प्रतिबंधित ईंधन पर लौट आए हैं। जिले में उद्योगों को पीएनजी में बदलने की योजना फेल हो गई है। यह प्रदूषण कम करने के प्रयासों को झटका है। क्योंकि वायु प्रदूषण में उद्योगों की बड़ी भागीदारी है। यह जानकारी एक आरटीआई में सामने आई है।
पिछले साल जिले में 219 उद्योग पीएनजी (पाइप्ड नैचुरल गैस) का इस्तेमाल कर रही थे, लेकिन अब तस्वीर पलट गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रदूषण की दिशा में काम रहे सुशील राघव ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि बॉयलर से संचालित उद्योग किस तरह के ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। जवाब में कंट्रोल बोर्ड ने बायलर पर संचालित जिले की 295 उद्योगों की लिस्ट दी, जिसमें पूरा ब्योरा दिया गया है कि कौन से उद्योग किस ईंधन पर संचालित है। सूची से पता चलता है कि महज तीन उद्योग ही गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें भूषण स्टील लिमिटेड औद्योगिक साइड-4 पीएनजी व लाइट डीजल ऑयल, डाबर इंडिया लिमिटेड लिमिटेड साहिबाबाद पीएनजी के साथ बायो ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह से मित्तल डाई एंड केमिकल साहिबाबाद पूरी तरह से पीएनजी पर संचालित जिले की एक मात्र कंपनी है।
तारकोल पर संचालित होती इंडस्ट्री
प्रदूषण की रोकथाम के लिए प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड और स्थानीय प्रशासन को लक्ष्य दिया गया था कि वो धीरे-धीरे उद्योगों को गैस से संचालित करने की दिशा में लेकर आए। इसके लिए जिले के सभी प्रमुख इंडस्ट्रियल एरिया में पीएनजी की पाइप लाइन डाली गई। सरकार ने मोहलत दी कि उद्योगों को पीएनजी व एलएनजी (लिक्विड फाइड नैचुरल गैस) में परिवर्तित होने तक कोयला व लकड़ी से चलाने की इजाजत होगी, लेकिन एक सीमित दायरे तक लेकिन यह पर स्थिति एकदम उलट हो गई। यहां पर लकड़ी और हार्ड कोयले के अलावा तारकोल, डीजल, चावल का भूसा तक उद्योगों में इस्तेमाल हो रहा है। पांच उद्योग तारकोल का इस्तेमाल कर रहे हैं। 14 डीजल का और सात इंडस्ट्री चावल के भूसे से चल रही हैं। जबकि शेष में कोयला, लकड़ी का ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रदूषण में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी उद्योगों की
क्षेत्र प्रतिशत
उद्योग - 51
वाहन - 27
फसल - 17
अग्निशमन कार्य - 5
आरटीआई में मिली जानकारी चौंकाने वाली है। एक तरफ बात की जा रही है कि प्रदूषण को रोकने के लिए इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। डीजल वाहनों पर रोक लगाई जा रही है, लेकिन दूसरी तरफ उद्योगों में प्रतिबंधित ईंधन का इस्तेमाल हो रहा है, जो सबसे ज्यादा प्रदूषण पैदा करता है। इससे पता चलता है कि सरकार की उद्योगों को पीएनजी पर चलाने की योजना धड़ाम हो गई है। - सुशील राघव, सामाजिक कार्यकर्ता