वैशाली से मोहनगर मेट्रो फेज-तीन और नोएडा से साहिबाबाद मेट्रो फेज-चार के फंडिंग पैटर्न पर ही दोनों प्रोजेक्ट का भविष्य टिका है। फंडिंग पैटर्न से तय हो पाएगा कि महानगर में अगला मेट्रो प्रोजेक्ट धरातल पर उतरेगा या नहीं। वैशाली से मोहननगर मेट्रो फेज-तीन कॉरिडोर की कुल लागत 1808.22 करोड़ है।
शासन को जीडीए की ओर से भेजे गए फंडिंग पैटर्न में 20 फीसदी केंद्र सरकार, 50 फीसदी राज्य सरकार और 30 फीसदी में जीडीए सहित अन्य विभाग शामिल हैं। इस कॉरिडोर में जीडीए का अंशदान 229.09 करोड़, नगर निगम का अंशदान 82.86 करोड़, आवास विकास परिषद का 146.23 करोड़ और यूपीएसआईडीसी का अंशदान 29.75 करोड़ है।
वैशाली से मोहननगर कॉरिडोर में जीडीए ने प्रदेश सरकार से 904 करोड़ की मांग की है। डीएमआरसी से 189.92 करोड़ के रोलिंग स्टॉक का प्रबंध करने को कहा है। केंद्र का अंशदान 226.77 करोड़ है। उधर, नोएडा से मोहननगर कॉरिडोर की कुल लागत 1517.01 करोड़ है। इसमें में फेज-तीन की तर्ज पर जीडीए का 152.54 करोड़, नगर निगम का 55.17 करोड़, आवास विकास परिषद का 97.37 करोड़ और यूपीएसआईडीसी का अंशदान 19.47 करोड़ है।
इसमें जीडीए ने यूपी सरकार से 758.51 करोड़ की मांग की है। केंद्र सरकार का अंशदान 236.16 करोड़ है। इसमें से 197.79 करोड़ के रोलिंग स्टॉक का प्रबंध डीएमआरसी से करने की मांग की गई है। ऐसे में जीडीए की ओर से तैयार किए गए इसी फंडिंग पैटर्न पर अगर मुहर लगती है तो जीडीए की आधी मुश्किल आसान हो जाएगी। संशोधित डीपीआर पर खुद केंद्रीय राज्यमंत्री व सांसद वीके सिंह की ओर से शासन में पैरवी की जा रही है।
ऐसे में जीडीए के भेजे गए फंडिंग पैटर्न पर मुहर लगने की संभावना प्रबल है। लखनऊ में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में जीडीए उपाध्यक्ष भाग लेंगी। अगर शासन पुराने पैटर्न पर ही आगे बढ़ता है तो जीडीए को प्रोजेक्ट पूरा करना आसान नहीं होगा।
बुधवार को जीडीए में पूरे दिन फंडिंग पैटर्न को लेकर बैठकों का दौर चला। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने बताया कि लखनऊ में होने वाली बैठक में प्राधिकरण की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।