छह माह के भ्रूण के लिए थाने के चक्कर लगा रहे हैं मां-बाप
गाजियाबाद। दो माह पहले पड़ोसियों से हुए झगड़े में पेट पर लात लगने से छह माह की गर्भवती का बच्चा पेट में ही मर गया। दंपति ने इसकी पुलिस से शिकायत की तो कड़े प्रयासों से 25 दिन बाद (एक अप्रैल) को मामले में निवाड़ी थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई। निवाड़ी थाने के गांव पैंगा निवासी सुरेंद्र का आरोप है कि पुलिस ने उनकी पत्नी का ना कोई मेडिकल कराया ना कोई जांच की। छह मार्च की घटना के बाद पुलिस उन्हें टरकाती रही और घटना के एक माह बाद (तीन अप्रैल) पुलिस ने मरे हुए बच्चे को पेट से बाहर निकलवाया। जिसे पुलिस ने अपने पास रख लिया। आरोप है कि पुलिस अब ना तो आरोपी को पकड़ रही और ना ही उनके बच्चे को उन्हें दे रही है। एक माह से दंपति भ्रूण को लेने के लिए थाने के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि पुलिस ने भ्रूण को डिब्बे में बंद करके थाने में रख रखा है।
सुरेंद्र ने बताया कि वह चौकीदारी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। वह परिवार के साथ गांव पैंगा में रहते थे। पड़ोस के रहने वाले पवन, संतोष और उनके दोनों बेटे आए दिन किसी ना किसी बात को लेकर झगड़ा करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि मार्च 2022 में उनकी पत्नी रानी छह माह की गर्भवती थी। छह मार्च को अपनी नौकरी पर गए थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले पवन व उनकी पत्नी रानी से झगड़ा करने लगी। झगड़े में उसके बेटे ने रानी के पेट में लात मार दी। इससे रानी की तबीयत बिगड़ गई। घर पहुंचकर उन्होंने रानी को निजी चिकित्सक को दिखाया को उन्होंने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस एक माह तक बहाने बनाकर टरकाती रही।
10 दिन बाद पोस्टमार्टम के लिए पहुंची पुलिस
सुरेंद्र ने बताया कि गर्भपात के बाद पेट से जब भ्रूण को निकलवाया गया तो पुलिस ने उसे अपने पास रख लिया। पुलिस को अगले दिन उसका पोस्टमार्टम कराना था लेकिन पुलिस 10 दिन बाद भ्रूण का पोस्टमार्टम कराने पहुंची। जहां चिकित्सकों ने भ्रूण की हालत खराब होने के कारण पोस्टमार्टम नहीं किया। सुरेंद्र ने बताया कि पुलिस ने उनसे लखनऊ जांच कराने की बात कही। आरोप है कि पुलिस अब तक उन्हें लखनऊ प्रयोगशाला से जांच कराने की बात कहकर टरका रही है।
एक माह बाद भी नहीं हुआ भ्रूण का अंतिम संस्कार
सुरेंद्र ने बताया कि पुलिस ने जांच कराने के नाम पर एक माह से भ्रूण को थाने में रख रखा है। उन्होंने पुलिस से मांगा तो पुलिस ने देने से इनकार कर दिया। एक माह बाद भी भ्रूण का अंतिम संस्कार नहीं हुआ।
जांच के लिए रंगीन फोटो भेजे गए
निवाड़ी थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि भ्रूण का रंगीन फोटो जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। भ्रूण थाने के मालखाने में जमा है। स्वास्थ्य विभाग के पैनल द्वारा या विधिक राय लेने के बाद भ्रूण परिजनों को सुपुर्द कर दिया जाएगा। मामले में एक आरोपी ने कोर्ट में समर्पण कर दिया। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।