दो बोगस फर्म बनाकर की 12.14 करोड़ रुपये की कर चोरी
गाजियाबाद। दो बोगस फर्म बनाकर 2021-22 में केवल कागजों मे करोड़ों रुपये का लेन-देन करके 12.14 करोड़ रुपये की कर चोरी कर राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। वाणिज्य कर विभाग की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो दिए गए पते पर कोई फर्म नहीं मिली। इस मामले में अधिकारियों ने कविनगर थाने में एक फर्म के मालिक सुरेंद्र और दूसरे मालिक प्रमोद कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। कविनगर थाना प्रभारी आनंद प्रकाश मिश्रा का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
10.17 करोड़ की कर चोरी की
राज्यकर अधिकारी राहुल कुमार गौतम का कहना है कि वाणिज्य कर विभाग की टीम पोर्टल पर जांच कर फर्मों पर शक के आधार पर ऐसी फर्मों की सूची तैयार कर मौके पर जाकर निरीक्षण कर रही है। उन्होंने लोहा मंडी में श्री पदमप्रभु स्टील नाम से पंजीकृत फर्म का निरीक्षण किया। मौके पर पाया गया कि फर्म में ताला लगा है और प्रथम दृष्यता सामने आया कि लंबे समय से दुकान नहीं खुली है। उन्होंने बताया कि आसपास फर्म के मालिक की फोटो दिखाकर फर्म व मालिक के बारे में जानकारी की गई तो आसपास के लोगों ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि फर्म में 2021-22 में 19.18 करोड़ रुपये की खरीद और 56.52 करोड़ रुपये की बिक्री विभागीय पोर्टल पर दिखाई गई। इसमें उन्होंने 10.17 करोड़ रुपये की कर चोरी व फर्जी आईटीसी की।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत कराई फर्म
कर विभाग के अधिकारी आरडी त्यागी ने बुलंदशहर रोड इंडस्ट्रीयल एरिया में प्रमोद ट्रेडर्स नामक फर्म का निरीक्षण किया जो पांच हजार गज क्षेत्र में पोर्टल पर दर्शाई गई थी। अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की तो पता चला कि वहां प्रमोद ट्रेडर्स नाम से कोई फर्म संचालित ही नहीं है। उन्होंने जमीन मालिक से संपर्क किया तो सामने आया कि उन्होंने किसी को यह क्षेत्र किराए पर ही नहीं दिया है। जांच में सामने आया कि कंपनी के लेखा जोखा में 2021-22 में 32.58 करोड़ रुपये की बिक्री और 10.97 करोड़ रुपये की खरीद दिखाकर 1.97 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई है। इस मामले में बोगस फर्म के मालिक प्रमोद कुमार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है।
फर्जी दस्तावेज पर पंजीकृत कराई गई दोनों फर्म
जांच में सामने आया कि श्री पदमप्रभु स्टील और मैसर्स प्रमोद ट्रेडर्स जहां संचालित दिखाई गई हैं वह दोनों संचालित ही नहीं पाई गईं। जिस पते पर फर्म दिखाई गई उनके मालिकों से संपर्क करने पर सामने आया कि उन्होंने किसी को भी दुकान व गोदाम किराए पर नहीं दिया है। जबकि बोगस फर्म मालिकों द्वारा फर्जी किरायानामा और बिजली के बिल पर फर्म पंजीकृत कराई गई हैं।