बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच इंतजाम कम पड़ने लगे हैं। जांच से लेकर रिपोर्ट और अस्पताल में भर्ती होने तक लंबी वेटिंग है। हाल यह है कि कोरोना की जांच के लिए सैंपल देने के लिए ढाई से तीन घंटे लाइन में लगना पड़ रहा है। आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का समय लग रहा है। संदिग्ध मरीजों की रैपिड एंटीजन किट से जांच की जा रही है। कोरोना की पुष्टि होने पर अस्पताल में भर्ती करना आसान नहीं है। शहर के कई बड़े निजी अस्पतालों में बेड खाली नहीं है।
संक्रमण के बीच जांच की रफ्तार धीमी होने से लोगों को समय पर इलाज मिल पाने में दिक्कत हो रही है। जांच में देरी के कारण संक्रमण कहीं अधिक तेजी से फैलने का खतरा बना हुआ है। क्योंकि बड़ी संख्या में आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल लेकर मरीजों होम आइसोलेशन में भेजे दिया जाता है। लंबे समय तक रिपोर्ट न आने के कारण मरीज घर में लापरवाही करता है, जिससे संक्रमण बाकी लोगों में भी फैलने का खतरा रहता है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि एक दिन में 1700 आरटीपीसीआर जांच के सापेक्ष 1925 और 4127 एंटीजन जांच की जा रही है। जबकि जांच केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद जांच नहीं हो रही है।
पूरी आबादी की जांच करने में लगेंगे कई साल
फैल रहे संक्रमण के बीच अब बड़ी आबादी की जांच करने की आवश्यकता है, लेकिन मौजूदा समय में जांच की गति बेहद धीमी है। अगर इसी गति से जांच की जाती है तो पूरी आबादी की जांच करने में करीब पांच साल का समय लगेगा। वर्तमान में जिले की आबादी करीब 45 लाख है और स्वास्थ्य विभाग 13 महीनों में 9.44 लाख सैंपलों की जांच कर पाया है। आंकड़ों से साफ है कि संक्रमण के सापेक्ष पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है।
जांच का हाल
- अभी जांच का दायरा बेहद सीमित है।
- कांटेक्ट ट्रेसिंग पूरी तरह नहीं हो रही।
- कंटेनमेंट जोन में भी सिर्फ समिति दायरे में सैंपलिंग।
- जांच केंद्रों पर दोपहर दो बजे के बाद नहीं लिए जा रहे सैंपल।
कब हो रही जांच
- लक्षण मिलने या विभागीय तौर पर रिपोर्ट मांगे जाने पर ही जांच।
- विदेश जाने, कुंभ या किसी दूसरे राज्य में जाने पर
- ऑपरेशन या प्रसव होने से पहले
14 दिन में संक्रमण दर 5.13 गुना हुई अधिक
कोरोना की पहली लहर लगभग समाप्त होने पर संक्रमण दर मात्र 0.69 फीसदी हो गई थी, लेकिन लापरवाही के चलते बीते 14 दिन में ही 5.13 गुना बढ़कर संक्रमण दर 3.53 पहुंच गई। इस अवधि में 1523 नए संक्रमति मिले हैं। इसके साथ ही स्वस्थ होने वालों की दर में कमी आई है। मार्च में स्वस्थ्य होने वालों की दर 98.51 थी जो अब 95.22 रह गई है।