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कोरोना से लड़ा और मजबूत हुआ गाजियाबाद

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कोरोना से लड़ा और मजबूत हुआ गाजियाबाद
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गाजियाबाद। लॉकडाउन में जिंदगी ठहर गई थी। संक्रमण के बीच 67 दिन तक चले लॉकडाउन के बीच लोग घरों में कैद रहे। अनलॉक से धीरे-धीरे जिंदगी पटरी पर लौटी। जिले के सैंपल पहले दिल्ली, फिर मेरठ और नोएडा जांच के लिए जाते थे। अब गाजियाबाद में जांच हो रही है। वैक्सीन बनी। टीकाकरण शुरू हुआ। कोरोना से लड़ाई को लेकर गाजियाबाद काफी हद तक सक्षम हुआ है।
कोरोना के खिलाफ दवाओं के माध्यम से शुरू हुई जंग अब वैक्सीन तक आ पहुंची है। एक वर्ष पहले कोरोना से लड़ने के लिए जिला के पास सीमित संसाधन थे। इलाज के नाम पर अस्पताल के रूप में मुरादनगर की सीएचसी थी और संजय नगर का संयुक्त अस्पताल थी। कोरोना जांच के नाम पर भी कुछ नहीं था। सैंपल जांच के लिए पहले दिल्ली, उसके बाद मेरठ और फिर गौतमबुद्धनगर की लैब में भेजा जाते थे। अब एक साल के बाद की बात करें तो तस्वीर बदल गई है। काफी स्तर तक जिला कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए सक्षम बना है।
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अब जिले में रैपिड एंटीजन किट के माध्यम से जांच की सुविधा है। इसके बाद आरटीपीसीआर और ट्रू-नॉट के माध्यम से सैंपल जांच की सुविधा है। जहां पर प्रतिदिन 1500 से 1700 जांच हो पा रही है। इससे मरीजों को जांच के बाद तत्काल इलाज मुहैया कराने में मदद मिली है। 45 लाख की लागत से बनाई गई आरटीपीसीआर लैब भी 24 घंटे काम कर रही है, जिससे कोरोना के संदिग्ध मरीजों की वास्तविक जांच करने में जिले को महारत हासिल हुई है। अब इलाज के लिहाज से देखा जाए तो जिले में आठ प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज को 793 बेड उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त सरकारी अस्पतालों में भी 650 बेड उपलब्ध हैं। इसके समय था जब खाली बेड नहीं होने पर मरीजों को दिल्ली, नोएडा या फिर मेरठ रेफर किया जा रहा था, लेकिन एल-1 से एल-3 स्तर के अस्पताल हैं। फिलहाल 90 प्रतिशत बेड खाली हैं। 12 संस्थानों में इमरजेंसी की स्थिति में करीब चार हजार बेड कुछ ही घंटे में उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इन सभी को इमरजेंसी के लिए रिजर्व में रखा गया है। जबकि आठ अस्पतालों में अभी तक इलाज चल रहा है।
तीन महीने से कोई मौत नहीं
समय पर जांच के बाद इलाज मुहैया होने और अब वैक्सीन आने के बाद जिला में कोरोना की रोकथाम करने में मदद मिली है। इसका का नतीजा है कि जिले में 19 दिसंबर 2020 के बाद कोरोना संक्रमण के चलते किसी की मौत नहीं हुई है। जबकि उससे पहले नौ महीनों में जिले के अंदर 102 लोगों की संक्रमण के चलते जान चली गई थी।
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स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन और आम लोगों के सहयोग से कोरोना नियंत्रण पर बेहतर सफलता मिली। इस समय संक्रमण एक बार फिर बढ़ना शुरू हुआ, इसके लिए जरूरी है कि सोसल डिस्टेंसिंग, मास्क एवं सैनिटाइजेशन के साथ ही टीकाकरण अवश्य कराएं। इस समय हमारे पास 5316 बेड की सुविधा उपलब्ध है। आम जनता से अपील है कि संक्रमण से बचाव करें और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति न आए। - डॉ. एनके गुप्ता, सीएमओ
संक्रमण की चपेट में आए लोगों पर एक नजर
2020 में जांच व संक्रमितों की संख्या
माह - जांच हुई - संक्रमित
मार्च - 164 - 08
अप्रैल - 2806 - 58
मई - 6365 - 239
जून - 10114 - 1310
जुलाई - 81591 - 3322
अगस्त -73820 - 3413
सितंबर -111518 - 5916
अक्तूबर - 125447 - 4179
नवंबर - 118182 - 4208
दिसंबर - 103123 - 2864
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2021 में जांच व संक्रमित
जनवरी - 69308 - 309
फरवरी - 43761 - 184
मार्च - 42547 - 281
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होम आइसोलेशन में स्वस्थ हुए - 10805
मौत - 102
अभी होम आइसोलेशन में सक्रिय - 71
रिकवरी रेट - 99.08 फीसदी
मृत्यु दर - 0.38 फीसदी
कुल संक्रमित दर - 3.71
मार्च में संक्रमण दर - 0.48 फीसदी
कांटेक्ट ट्रेसिंग - 99.62 फीसदी
पिछले 14 दिन में संक्रमित - 177
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कोरोना से बचाव के लिए अब तक बुजुर्ग एवं 45 वर्ष से अधिक बीमार का टीकाकरण - 60588
स्वास्थ्य कर्मी - 21429
फ्रंट लाइन वर्कर - 13452
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