एक्सप्रेसवे की जमीन खरीद में फर्जीवाड़ा
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे जमीन अधिग्रहण घोटाले में साढ़े तीन साल के बाद फिर से दो नई एफआईआर दर्ज की गई हैं। जमीन अधिग्रहण कानून की धारा-3 के बाद भी बैनामे किए जाने को लेकर एक्सप्रेसवे के प्रबंधक पर भारतीय दंड संहिता की धारा-420 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। थाना मसूरी में पहली रिपोर्ट विजय नगर निवासी गौरव शर्मा व नौ अन्य की तहरीर पर दर्ज की गई है जबकि दूसरी ग्राम घुघरावली कोतवाली देहात बुलंदशहर निवासी भोपास सिंह व चार अन्य की शिकायत पर दर्ज हुई है।
पीड़ित भोपास सिंह व गौरव शर्मा का आरोप है कि नियम के तहत धारा-3डी के बाद जमीन की खरीद बिक्री का अधिकार नहीं था। सारे दस्तावेज पहले से एक्सप्रेसवे का काम देख रहे प्रबंधक के पास थे लेकिन उसके बाद भी कॉलोनीनाइजर (बिल्डरों) की तरफ से जमीन बेचने का सिलसिला जारी रहा। खसरा नंबर 100 व 460 की जमीन बिल्डर की तरफ से प्लाट काटकर जमीन बेच दी गई। जबकि नियम के तहत इस जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती थी लेकिन बिल्डर धड़ल्ले से जमीन बेचता चला गया। हमारे जैसे काफी लोग अंधेरे में रहे। एनएचएआई की सांठगांठ पर जमीन की खरीद-बिक्री का खेल चला और जब एनएचएआई ने जमीन पर कब्जा लिया तो मुआवजा बिल्डर को दे दिया गया। गौरव शर्मा का कहना है कि हमारे पक्ष में जमीन की रजिस्ट्री हुई। सारे दस्तावेज हमारे पास है लेकिन उसके बाद भी मुआवजा किसी को नहीं मिला। लंबे समय से लोग विरोध कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
धारा-3 डी के बाद नहीं था जमीन बेचने का अधिकारी
पीड़ितों ने सवाल उठाया है कि जब जमीन अधिग्रहण को लेकर धारा-3 डी का नोटिफिकेशन हो चुका था तो उसके बाद भी रजिस्ट्री कैसे होती रहीं। इस पूरे खेल में उस समय का स्थानीय प्रशासन और एनएचएआई के लोग शामिल हैं और अगर रजिस्ट्री लीगल तरीके से की गई तो फिर हम सभी को जमीन का मुआवजा मिलना चाहिए। अगर रजिस्ट्री गलत तरीके से की गई तो बिल्डर पर कार्रवाई हो और जेल भेजकर वसूली की जाए।
कमिश्नर की जांच में हुआ था घोटाले का खुलासा
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का निर्माण समय पर पूरा न हो पाने के पीछे एक वजह घोटाला भी रहा है। अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों ने मिलकर धारा-3डी के बाद एक्सप्रेसवे में अधिग्रहीत होने वाले जमीन को खरीदा और फिर एनएचएआई को बाजार मूल्य से चार गुना को दे दिया। वर्ष 2017 में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार की तरफ से मामले में जांच कराई तो खुलासा हुआ कि पूरे खेल में कई बड़े खिलाड़ी लिप्त है। जांच के बाद अक्तूबर 2017 में थाना कविनगर में 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसमें तत्कालीन एडीएम घनश्याम सिंह, उनके बेटे शिवांग राठौर, तत्कालीन अमीन संतोष कुमार, पत्नी लोकेश बेनीवाल आदि के नाम शामिल थे।