मासूम से दुष्कर्म व हत्या के दोषी को 29 दिन में फांसी की सजा
गाजियाबाद। ढाई साल की मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले अभियुक्त को पॉक्सो कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। खास बात ये है कि कोर्ट ने मात्र 29 दिन में मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुना दिया। पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने अभियुक्त पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की आधी धनराशि मृतक बच्ची के परिजनों को दी जाएगी। फैसला सुनाते समय न्यायाधीश ने इस घटना को समाज को झकझोरने वाली बताया और कहा कि यदि अभियुक्त को फांसी की सजा नहीं दी गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि आखिर ढाई साल की मासूम से कोई ऐसी दरिंदगी कैसे कर सकता है।
पॉक्सो कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स ने बताया कि कवि नगर थाना क्षेत्र में 18 अक्तूबर 2020 को चंदन पांडेय ने पड़ोस में रहने वाली एक महिला की गोद से उसकी ढाई वर्षीय बच्ची को खिलाने के नाम पर ले लिया था। इसके बाद बच्ची को सुनसान स्थान पर ले गया। वहां उसने बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया फिर उसकी हत्या कर शव झाड़ियों में फेंक दिया। बच्ची के लापता होने पर परिजनों ने कवि नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने बच्ची के पिता की तहरीर पर चंदन के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट, हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया था। इस मामले में पुलिस ने 19 दिसंबर को कोर्ट में चार्जशीट पेश की थी। केस में 10 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सोमवार को विशेष पॉक्सो एक्ट कोर्ट के न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए सुबूत और गवाहों के बयान के आधार पर चंदन को मासूम से दुष्कर्म करने, उसकी हत्या करने और साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया था। बुधवार को कोर्ट ने अभियुक्त को फांसी की सजा सुनाई।
सजा सुनते ही कांपने लगा दोषी
फांसी की सजा सुनते ही चंदन कांपने लगा। उसने अदालत से बाथरूम जाने की अनुमति मांगी। अदालत ने पुलिस अभिरक्षा में चार जवानों के साथ उसे बाथरूम भेजा। इस दौरान उस पर कड़ी नजर रखी गई।
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यह थी घटना
मृतक बच्ची के पिता बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। वह कविनगर थाना क्षेत्र में रहकर ठेकेदार के साथ फैक्टरी में काम करते हैं। अभियुक्त चंदन पांडेय मोतिहारी, बिहार का रहने वाला है। वह भी बच्ची के पिता के साथ उसी ठेकेदार के साथ काम करता था। चंदन अकेला रहता था। मृतका के पिता उसे अपने साथ दोस्त की तरह रखते थे। 19 अक्तूबर को वह बच्ची के पिता और दो अन्य लोगों के साथ बैठकर शराब पी रहा था। इस पर बच्ची की मां ने पति और चंदन को शराब पीने पर फटकार लगाई थी। इस बात से चंदन उनसे नाराज हो गया था। कुछ देर बाद चंदन बच्ची के घर जाकर उसे खिलाने के बहाने उसकी मां से मांग लाया था। इसके बाद उसे सुनसान स्थान पर ले जाकर दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या कर दी। चंदन ने पुलिस की पूछताछ में बताया था कि उसने ढाई साल पहले बच्ची के पिता से हुए झगड़े और शराब पीने के दौरान बच्ची की मां द्वारा फटकारने का बदला लेने के लिए घटना को अंजाम दिया था।
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न्यायालय पर लोगों का विश्वास बना रहे इसलिए ऐसी सजा जरूरी
सुनवाई के दौरान पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव ने अपनी विशेष टिप्पणी में कहा कि आखिर एक व्यक्ति मासूम के साथ ऐसी दरिंदगी कैसे कर सकता है। ऐसी घटनाएं समाज को हिलाकर रख देती हैं। इसी कारण बच्चों की लैंगिक अपराधों से रक्षा करने के लिए कठोर दंड का प्राविधान करते हुए पॉक्सो अधिनियम 2012 पारित किया गया। धारा 6(1) पॉक्सो अधिनियम के तहत मृत्युदंड का प्रावधान है। यदि न्यायालय द्वारा ऐसे गंभीर मामले में मृत्युदंड देने की शक्ति का प्रयोग नहीं किया गया तो समाज में गलत संदेश जाएगा और आम जनता हैदराबाद एनकाउंटर (महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या के आरोपियों का पुलिस एनकाउंटर) मामले को वैध ठहराएगी। इससे न्यायालय की प्रासंगिकता पर प्रश्न उठेगा। ऐसे में कानून का शासन स्थापित किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि लोगों का विश्वास न्यायतंत्र व न्यायालय पर बना रहे।