फर्नीचर के गोदाम से शुरू हुई आग बराबर में ही अखलाक के कबाड़ के गोदाम तक पहुंच गई। आग लगती देख आसपास हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरिफ ने बताया कि उनकी आंख लग चुकी थी कि अचानक चीख-पुकार की आवाज आने लगी। आंख खुली तो देखा कि लोग कमरों से निकलकर भाग रहे हैं। सड़क पर आकर देखा तो मकान के पीछे वाले फर्नीचर के गोदाम में आग की लपटें उठ रही थीं।
वहीं, फारूक ने बताया कि फर्नीचर गोदाम के बाहर होटल में खाना खाने के लिए आए थे, जैसे ही आग लगी होटल संचालक ने तुरंत सभी को बाहर निकालकर शटर बंद कर दिया। थोड़ी देर में थोड़ी ही देर में भगदड़ मचने लगी। गोदाम से सटी इमारतों में यदि आग लग जाती तो संकरी गलियों में दमकल की गाड़ियों का पहुंच पाना मुश्किल होता।
देर रात तक सुलगती रही आग
करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर काबू तो पा लिया, लेकिन देर रात तक फर्नीचर के गोदाम में आग सुलगती रही। कबाड़ के गोदाम में टायर भी पढ़े थे जिन में लगी आग को बुझाने में काफी समय लगा। खबर लिखे जाने तक दमकल की गाड़ियों का आना जारी था। हालांकि, हालात सामान्य हो गए थे।
नोएडा ने संभाली कमान
आग लगने की सूचना पर सबसे पहले नोएडा की दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। खोड़ा के नजदीक ही सेक्टर-58 का फायर स्टेशन है। यहां से दमकल की गाड़ियों को रवाना किया गया। गाजियाबाद से दमकल की गाड़ियां आईं तब तक आग बुझाने का कार्य जारी था।