गाजियाबाद में ट्रेन से गिरकर दोनों पैर गंवाने वाले युवक को एंबुलेंस में खून लगे होने का हवाला देकर दिल्ली नहीं ले जाया गया। युवक एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में 25 मिनट तक दूसरी एंबुलेंस के इंतजार में मौत से जूझता रहा, फिर दम तोड़ दिया।
मरीजों के लिए जिस एंबुलेंस को आशा की किरण माना जाता है, वही एक घायल की आखिरी उम्मीद बनकर रह गई। ट्रेन हादसे में दोनों पैर गंवाने और अत्यधिक रक्तस्राव से जूझ रहे 23 वर्षीय अक्षय को डॉक्टरों ने दिल्ली रेफर किया, लेकिन आरोप है कि एंबुलेंस चालक ने वाहन में खून लगा होने का हवाला देकर मरीज को ले जाने से मना कर दिया।
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एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में करीब 25 मिनट तक दूसरी एंबुलेंस के इंतजार में मौत से जूझने के बाद अक्षय ने दम तोड़ दिया। एमएमजी अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) डॉ. बृजेश कुमार ने बताया कि अक्षय बुधवार को चंद्रनगर हॉल्ट के पास ट्रेन से गिरकर घायल हुए थे। हादसे में उनके दोनों पैर घुटने के नीचे से कट गए थे।
स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची 108 एंबुलेंस उन्हें सुबह 9:40 बजे अस्पताल लेकर पहुंची। उस समय उनके साथ कोई पुलिसकर्मी नहीं था। इमरजेंसी में डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन लगातार हो रहे रक्तस्राव के कारण उनकी हालत बिगड़ती गई।
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करीब 10 मिनट बाद डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया। ईएमओ ने बताया कि जिस एंबुलेंस से अक्षय को अस्पताल लाया गया था, उसके चालक से उनको दिल्ली ले जाने के लिए कहा गया। चालक ने एंबुलेंस में खून लगा होने का हवाला देते हुए जाने से मना कर दिया। दूसरी एंबुलेंस की व्यवस्था होने से पहले ही करीब 10:15 बजे अक्षय ने दम तोड़ दिया।
मिला जांच का आश्वासन...लेकिन व्यवस्था कैसे सुधरेगी
108 और 102 एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी मोहित कुमार ने माना कि इमरजेंसी कॉल के बावजूद मरीज को नहीं ले जाना बड़ी लापरवाही है। उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषी मिलने पर चालक के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। एंबुलेंस सेवा के नोडल अधिकारी व जिला मलेरिया अधिकारी ज्ञानेंद्र मिश्रा ने भी मामले को गंभीर बताते हुए जिला प्रभारी से दो दिन में रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि आरोप साबित होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, सवाल यह है कि जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी होने तक क्या ऐसी व्यवस्था सुधर पाएगी?
वृंदावन घूमने आए थे औरंगाबाद निवासी अक्षय
अक्षय के बहनोई नोएडा निवासी पंकज ने बताया कि वह मूल रूप से औरंगाबाद (बिहार) के रहने वाले थे और बीते दिनों अकेले वृंदावन घूमने आए थे। मंगलवार को अक्षय उनके पास नोएडा में रुके थे। बुधवार को वह दिल्ली से किसी ट्रेन में सवार होकर बिहार लौट रहे थे। इसी दौरान दिल्ली-गाजियाबाद की सीमा के नजदीक चंद्रनगर हॉल्ट में हादसा हो गया। हालांकि, अभी यह पता नहीं चल पाया है कि हादसा कैसे हुआ।
काश रक्षाबंधन तक बहन के यहां रुक जाता
ऑटो चालक परिवार का पालन पोषण करने वाले पंकज ने बताया कि अक्षय बेरोजगार था। उसने जब फोन पर बताया कि वृंदावन घूमने आया है तो पंकज की पत्नी ने उसे नोएडा आने के लिए कहा। उसने कहा था कि यहां कोई काम दिलवा देंगे।