गाजियाबाद। अगस्त से आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलेगी । इसके लिए परिषदीय स्कूल के शिक्षकों की मदद ली जाएगी। शिक्षक बच्चों के लिए टीचर लर्निंग मटेरियल (टीएलएम) तैयार करेंगे। इसमें बच्चे खेल-खेल में पढ़ना सीखेंगे। इस योजना से पहले चरण में जनपद के 330 आंगनबाड़ी सेंटर की सूरत बदली जाएगी।
इस तरह का प्रयोग पहले भी जिलाधिकारी मिनिस्ती एस द्वारा किया जा चुका है। यह प्रयोग बाराबंकी में किया गया था। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयस कुमार ने बताया कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मदद से आंगनबाड़ी सेंटर की कायाकल्प करने की मुहिम के पीछे आंगनवाड़ी को किन्डर गार्डन में तब्दील करने का लक्ष्य है।
ताकि बच्चे केवल पोषाहार खाकर ही न रह जाए उनका सर्वागीण विकास हो सके। दरअसल आंगनबाड़ी सेंटर पर खिलौने व लर्निंग सामग्री रखने के लिए किसी विशेष बजट का प्रावधान नहीं होता, जबकि परिषद में शिक्षकों को टीएलएम का बजट दिया जाता है।
डीएम के निर्देशानुसार सभी अब परिषदीय शिक्षकों द्वारा उनके टीएलएम के बजट के जरिए बच्चों के लिए आर्ट-क्राफ्ट व अन्य सामग्रियों से खिलौने तैयार कर आगंनवाड़ियों को दिए जाएंगे। खेल-खेल में बच्चें को सिखाने वाले ऊन के गेंद, कपड़े की गुड़िया और पेपर चार्ट की मदद से अक्षर ज्ञान की सामग्री भी शिक्षकों द्वारा तैयार की जाएगी।
श्रेयस कुमार ने बताया कि इस संबंध में बीएसए को डीएम कार्यालय से लेटर जारी किया जा चुका है। जुलाई में स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों को यह सर्कुलर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद शिक्षक टीएलएम से बच्चों के लिए खेल व लर्निंग सामग्री तैयार करेंगे, जिसे जुलाई के अंत व अगस्त के आरंभ तक सेंटरों पर रखवा दिया जाएगा।
गाजियाबाद में 1375 आंगनबाड़ी सेंटर हैं, पहले चरण में पाएलट प्रोजेक्ट के तौर पर इनमें से 330 सेंटर ही चयनित किए गए हैं जिसे मॉडल बनाया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों के लिए आंगनबाड़ी सेंटर पर झूला आदि की व्यवस्था की जाएगी और बेबी फ्रेंडली शौचालय बनवाए जाएंगे।
अब आंगनबाड़ी सेंटर केवल पोषाहार वितरण केंद्र नहीं बल्कि बच्चों की पहली पाठशाला भी बनेगी, जिसमेंखेल-खेल में बच्चों को सिखायी होगी। इससे स्कूल जाने से पूर्व आंगनबाड़ी सेंटर की मदद से बच्चों को प्ले वे की तर्ज पर सुविधाएं देकर उनके ज्ञान को विकसित किया जाएगा।