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एनसीआर पर स्मॉग का सितमः हालात हुए बद से बदतर

Sun, 06 Nov 2016 12:30 AM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
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स्माॅग - फोटो : अमर उजाला
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दिवाली के बाद से ही आसमान पर छाया स्मॉग अब विकराल होता जा रहा है। बुजुर्गों और दमा रोगियों को ही नहीं अब यह बच्चों और जवानों को भी टेंशन देने लगा है। शनिवार को आसमान पर इस कदर स्मॉग छाया था कि लोगों को आंखों में पानी निकलने और उनमें जलन होने की शिकायत होने लगी।
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सड़क और बाजारों की तो बात ही क्या, घरों और दफ्तर में बैठे लोग भी स्मॉग का शिकार हुए। प्रदूषित धुंध आफिस और घरों के अंदर तक जा घुसी। ऐसे में लोगों को गले में खराश और आंखों में जलन की शिकायत हुई। ऐसे में लोगों को डॉक्टरों के पास जाना पड़ा। 23 मंजिल तक ऊंची हाईराइज बिल्डिंग भी स्मॉग की चपेट में आ गईं।

शहर दिन भर स्मॉग की चादर में लिपटा रहा।दिवाली के बाद चार से पांच दिन में प्रदूषण के कण हवा के साथ ऊपर उठ जाते हैं और हवा कुछ हद तक सांस लेने लायक हो जाती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका है। सौ मीटर से ऊपर प्रदूषण के कण जा ही नहीं पा रहे हैं। इसकी वजह से भयानक स्थिति बन गई है।
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शुक्रवार के मुकाबले स्मॉग शनिवार को बहुत ज्यादा रहा। सौ मीटर तक बड़े क्षेत्र में स्मॉग का घेरा बना हुआ है, जिससे लोगों का दम घुट रहा है। शनिवार लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत घरों के अंदर स्मॉग के घुस जाने से रही। लोगों की आंखों में भीषण जलन होने लगी। यहां तक कि घर के अंदर भी लोगों को धुंधला दिखने लगा।

आंखों में जलन
शनिवार को सरकारी सहित प्राइवेट अस्पतालों में सबसे अधिक आंखों में जलन की समस्या को लेकर मरीज आए। सरकारी अस्पतालों में रोजाना जहां लगभग 300 तक मरीज आते हैं, वहीं शनिवार को आंखों की समस्या को लेकर पांच सौ से ज्यादा मरीज आए। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजली अधिकतर लोगों ने आंखों में जलन और पानी आने की समस्या बताई।

नवजात शिशुओं का रखें ध्यान
इस मौसम का सबसे अधिक नवजात शिशुओं पर पड़ा है। सरकारी अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ के यहां निमोनिया केमरीज आ रहे हैं। इसमें अधिकतर चार महीने से लेकर दो साल तक के बच्चे शामिल हैं। रोजाना अस्पताल में तीन सौ तक बच्चे आ रहे हैं जिसमें से अधिकतर को निमोनिया है और सर्दी-जुकाम की समस्या है।

डॉ. शालिनी तिवारी ने बताया कि जहां तक हो सके बच्चों को अभी बाहर न ले जाएं। घर में बच्चों को साफ-सुथरे माहौल में रखें। बच्चों को फुल स्लीव के कपड़े पहनाएं।

- 40 मीटर तक रही विजिबिलिटी
शनिवार को सड़कों पर विजिबिलिटी 40 मीटर से भी कम रही, जिसकी वजह से वाहन चालकों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात यहां तक कि पहुंच गए कि स्मॉग ने वाहनों की गति पर लगाम लगा दी और सुनसान सड़क पर भी वाहन चालकों को ड्राइविंग करने में दिक्कत पेश आई।

- तापमान में अचानक कमी और धुंध ने किया बेहाल
पर्यावरणविद विक्रांत शर्मा ने बताया कि तापमान में अचानक कमी और धुंध की वजह से प्रदूषण के कण और गैसें ऊपर नहीं जा रहीं हैं, जिसकी वजह से स्मॉग जमा हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पारसनाथ ने बताया कि जैसे-जैसे प्रदूषण के कण ऊपर जाएंगे, वैसे-वैसे स्मॉग से राहत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में पुआल जलाए जाने से फैला धुआं ऊपर नहीं उठ पाने से दिक्कत बढ़ गई है। दिवाली पर हुआ पटाखों का धुआं भी ऊपर नहीं उठ पा रहा है।  

- बोले लोग
आंख में बहुत ज्यादा जलन हो रही है अब। लाल होने के साथ ही आंख से पानी भी निकलने लगा है। - एसके पांडे, वसुंधरा
 हर दिन के साथ स्मॉग बढ़ रहा है। घुटन होने के साथ ही सिर में दर्द रह रहा है और चक्कर आ रहे हैं। - कल्पना, वसुंधरा

लगातार स्वांस फूलने और घुटन की समस्या हो रही है। पिछले दो तीन दिनों से यह समस्या और बढ़ गई है। - लकी तोमर, राजनगर एक्सटेंशन
आंखों में जलन की समस्या है। पहले तो घरेलू उपाय गुलाब जल आदि डाला लेकिन ठीक नहीं हुआ तो डाक्टर को दिखाना पड़ा। - पूजा शर्मा, राजनगर एक्सटेंशन

- फेफड़ों और आंख पर खतरा
पीएम-10 का 200 से अधिक होना सेहत पर खतरा है। पलमोनोलॉजिस्ट डा. केके पांडे ने बताया कि पीएम-10 के कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच कर जम जाते हैं, जिससे लोगों को अस्थमा, ब्रांकाइटिस और अन्य श्वास संबंधी दिक्कत हो रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. शशांक शुक्ला ने बताया कि प्रदूषण से आंखों में जलन होने पर रगड़े नहीं, धूल के कण पुतली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जलन होने पर आंख को ठंडे पानी से धोएं और फिर भी दिक्कत हो तो डॉक्टर की सलाह से दवा लें।

स्मॉग : अभी भी नहीं संभले तो होगी मुश्किल
लगातार बढ़ रहे प्रदूषण पर शहर के बाशिंदे अभी भी नहीं संभले तो अगले 10 वर्षों में भयावह स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। बीते तीन वर्षों के मुकाबले इस वर्ष प्रदूषण में 121 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। दिवाली के बाद प्रदूषण के आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2013 के बाद इस वर्ष सबसे ज्यादा प्रदूषण रहा है।

वर्ष 2013 में हॉट सिटी में सबसे ज्यादा प्रदूषण दर्ज किया गया था, इस दौरान पीएम-10 का स्तर 900 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जबकि अगले वर्ष 2014 में ये घट कर 427 और वर्ष 2015 में घट कर 410 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक आ गया था।

वर्ष 2016 में प्रदूषण ने रिकार्ड ही तोड़ दिया और पीएम-10 के कण 910 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गए। यानि पिछले वर्ष के मुकाबले 121 फीसदी की बढ़ोत्तरी हो गई। यह स्थिति भविष्य के लिए खतरनाक है।

दिवाली के पांच से छह दिन बाद भी नहीं घटा प्रदूषण
उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक बीते तीन वर्षों के दौरान दिवाली के पांच से छह दिन के बाद पर्टिकुलेट मैटर (पीएम)-10 के कण हवा में 230 से 390 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गए थे। इस दिवाली ऐसा नहीं हुआ, अभी भी पीएम-10 के कण हवा में 900 से 999 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच में हैं।  

वर्ष की शुरुआत ही अधिक प्रदूषण के साथ हुई
वर्ष की शुरुआत जनवरी 2016 में टीएचए में पीएम-10 मानक का चार गुना 402.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था और गाजियाबाद में मानक से साढ़े तीन गुना अधिक 354.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।
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दिवाली के दौरान शहर में पीएम-10 की स्थिति  

वर्ष         गाजियाबाद        ट्रांस हिंडन
2016        720            910
2015        496            410

2014        507            427
2013        796            900

नोट: आंकड़े माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर में
 
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