गाजियाबाद। दिलशाद गार्डन टू नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए नगर निगम, आवास विकास परिषद और यूपीएसआईडीसी ने अपने हिस्से का फंड नहीं दिया तो अब जीडीए उनके ‘पैरेंटल डिपार्टमेंट’ से फंड मांगेगा। इससे पहले जीडीए ने एक बार फिर सभी विभागों को डिमांड लेटर जारी कर मेट्रो के लिए फंड मांगा है।
वहीं, अब मेट्रो की 2210 करोड़ की रिवाइज्ड डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को यूपी कैबिनेट से मंजूरी मिल सकती है। इस डीपीआर को आगामी कैबिनेट बैठक में पेश किया जा सकता है। जीडीए ने अपडेट डीपीआर शासन को भेज दी है।
शुरुआत में 9.41 किलोमीटर लंबे इस मेट्रो प्रोजेक्ट का बजट 1790 करोड़ रुपये था। वर्ष 2015 में इसकी डीपीआर को संशोधित किया गया और बजट बढ़कर 2210 करोड़ रुपये हो गया। इस प्रोजेक्ट में जीडीए को 695.40 करोड़ रुपया देना है।
नगर निगम को 246 करोड़, आवास विकास परिषद को 440.20 करोड़, यूपीएसआईडीसी को 98 करोड़, केंद्र सरकार को 402.40 करोड़ जबकि डीएमआरसी को 328 करोड़ रुपया देना है। जीडीए 640 करोड़ रुपये डीएमआरसी को दे चुका है।
आवास विकास परिषद ने सिर्फ 50 करोड़ और यूपीएसआईडीसी ने तीन करोड़ रुपये मेट्रो प्रोजेक्ट में दिए हैं। इसके बाद कई बार डिमांड लेटर भेजने के बावजूद इन विभागों ने पैसा नहीं दिया। नगर निगम बोर्ड ने जीडीए को उसकी जमीनों का पैसा समायोजित करने का प्रस्ताव देकर इस प्रोजेक्ट में फंड देने से इनकार कर दिया है।
ऐसे में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंड की कमी हो गई है। जीडीए अब नगर निगम के पैरेंटल डिपार्टमेंट नगर विकास विभाग समेत अन्य विभागों के पैरेंटल डिपार्टमेंट को प्रस्ताव भेजकर फंड की डिमांड करेगा। आवास विभाग के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद है कि जीडीए को मेट्रो के लिए यह फंड मिल जाएगा।
कैबिनेट से पास हुई डीपीआर तो फंड देगी केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने संशोधित डीपीआर यूपी कैबिनेट से पास न होने की वजह से अपना 402.40 करोड़ का हिस्सा रिलीज नहीं किया है। जब तक डीपीआर को प्रदेश सरकार से मंजूरी नहीं मिलेगी, केंद्र सरकार फंड नहीं देगी। अब जीडीए अधिकारियों को उम्मीद है कि यूपी कैबिनेट से डीपीआर को जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद केंद्र सरकार से भी 402 करोड़ रुपये मिल जाएंगे।
420 करोड़ रुपये बढ़ी लागत
मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत 420 करोड़ रुपये बढ़ गई है। वर्ष 2013 में दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट की 1790 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई थी। वर्ष 2015 में इसकी डीपीआर रिवाइज की गई तो यह रकम बढ़कर 2210 करोड़ रुपये हो गई। यानी इस प्रोजेक्ट की कीमत में 420 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो गई। यह बढ़ी रकम सभी विभागों को वहन करना है।
चार स्टेशन की एंट्री प्वाइंट की दिक्कत होगी दूर
मेट्रो के चार स्टेशनों की एंट्री के लिए जमीन न मिल पाने की वजह से इनके निर्माण में देरी हो रही है। अर्थला, शहीद नगर समेत इन चारों स्टेशनों के लिए अब जीडीए एंट्री प्वाइंट के लिए जमीन खरीदेगा। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि एक महीने में यह सारी दिक्कतें दूर कर ली जाएंगी और मेट्रो का ट्रायल निर्धारित समय पर कराया जाएगा।
रिवाइज्ड डीपीआर शासन को भेज दी गई है। जल्द ही इसे कैबिनेट में रखे जाने और मंजूरी की उम्मीद है। मेट्रो प्रोजेक्ट की फंडिंग में हिस्सेदार सभी विभागों को डिमांड लैटर जारी कर पैसा मांगा गया है। स्थानीय स्तर से फंड न मिला तो इन विभागों के पैरेंटल डिपार्टमेंट से फंड लिया जाएगा। सरकार के हस्तक्षेप से फंड जल्द ही मिलने की उम्मीद है। - कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए