शहर में अकेले मिडोज विस्टा नहीं हैं, ऐसी 36 ग्रुप हाउसिंग सोसायटी हैं, जिन्होंने नक्शा पास कराने के बाद बाह्य विकास शुल्क जीडीए को समय से अदा नहीं किया है। मिडोज विस्टा पर जीडीए का पौने ग्यारह करोड़ रुपये बकाया है जबकि 36 सोसायटी के बिल्डर करीब दो अरब से अधिक रुपया दबाकर बैठे हैं। अब जीडीए अपना बकाया वसूलने के लिए इन सभी सोसायटी को सील करने की कार्रवाई करेगा।
मंगलवार को मिडोज विस्टा को सील कर जीडीए ने इस कार्रवाई की शुरुआत की है। हालांकि इन सोसायटीज में फ्लैट बुक कराने वाले हजारों आवंटियों की टेंशन बढ़ जाएगी। उन्हें आशियाने के लिए लंबा इंतजार करना होगा।मंदी की मार से गुजर रहे जीडीए ने पिछले दिनों अपनी आय बढ़ाने को बैठकें की थीं।
यह बात सामने आई कि तीन दर्जन ग्रुप हाउसिंग सोसायटी ने वर्षों से बाह्य विकास शुल्क व क्रय योग एफएआर शुल्क नहीं चुकाया है। 15 दिन पहले ऐसी 36 सोसायटी की सूची बनाई गई। एक अनुमान के अनुसार इन पर जीडीए का दो अरब से अधिक रुपया बकाया है। चीफ टाउन प्लानर इश्तियाक अहमद ने बताया कि इनसे यह राशि वसूलने के लिए प्रवर्तन शाखाओं को यह सूची सौंप दी गई है।
इन सबके खिलाफ सीलिंग अभियान चलेगा।चीफ टाउन प्लानर ने बताया कि सूची में शामिल कई ऐसी सोसायटी हैं, जिन्होंने 2008 के बाद से बाह्य विकास शुल्क जमा नहीं कराया। 40 हजार वर्गमीटर से अधिक की ग्रुप हाउसिंग सोसायटी को यह सुविधा दी गई है कि वे नक्शा पास कराने के बाद चार छमाही किश्तों में दो साल के अंदर बाह्य विकास शुल्क व क्रय योग एफएआर शुल्क जमा करा दें।
समय से शुल्क जमा नहीं कराने पर ब्याज के साथ शुल्क वसूलने का प्रावधान है। पहले ब्याज का दर 16.5 प्रतिशत था। रीयल एस्टेट डाउन चलने केचलते छह माह पहले यह राशि घटाकर 12 प्रतिशत कर दी गई।
आर्थिक संकट में सूझी कार्रवाई
जीडीए सूत्रों ने बताया कि यह शुल्क वसूलने के मामले में जीडीए शुरू से सुस्त रहा है। जब जीडीए पर आर्थिक संकट के इस दौर में आय बढ़ाने का दबाव पड़ा तब शुल्क वसूलने की यह कार्रवाई सूझी।
सील के दौरान रखा जाएगा आवंटियों का ध्यान चीफ टाउन प्लानर ने बताया कि सूची में शामिल अधिकांश सोसायटी निर्माणाधीन हैं।
निर्माणाधीन सोसायटी पर सील की कार्रवाई से तत्काल आवंटी परेशान नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि मिडोज विस्टा की फेज वन व टू दो सोसायटी हैं। दोनों सोसायटी को मिलाकर पौने ग्यारह करोड़ रुपया बकाया है। फेज वन में चूंकि लोग रह रहे हैं इसलिए उसे सील नहीं किया गया। सील की कार्रवाई फेज टू पर की गई, जो निर्माणाधीन है। जीडीए आगे भी सील की कार्रवाई आवंटियों के हितों को ध्यान में रखकर करेगा।