गाजियाबाद। प्रतिबंधित कोडीनयुक्त कफ सीरप की तस्करी में गाजियाबाद के गोदामों और कथित फर्जी फर्मों के इस्तेमाल का मामला एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को साहिबाबाद के यूपी बॉर्डर क्षेत्र स्थित एक गोदाम से प्रतिबंधित कफ सीरप की 310 पेटियां पकड़ी गईं। सीरप का नाम विसरॉक्स बताया गया है, जिसका निर्माण हिमाचल प्रदेश के पोंटा साहिब स्थित हेल्थकेयर लिमिटेड कंपनी में होना बताया गया है। करीब 11 महीने पहले मेरठ रोड के हरबंश नगर स्थित मछली गोदाम से भी प्रतिबंधित कफ सीरप की 350 पेटियां पकड़ी गई थीं। दोनों मामलों में पोंटा साहिब की कंपनियों के नाम सामने आने से तस्करी के नेटवर्क और जिले में गोदामों के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जांच में पहले सामने आए तथ्यों के मुताबिक, तीन नवंबर 2025 को मेरठ रोड पर पकड़े गए कफ सीरप का संबंध पोंटा साहिब स्थित लेबोरेट फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड और एबॉट कंपनी के फेंसेडिल ब्रांड से बताया गया था। इससे पहले ऑनवेक्स और ऑनरेक्स नाम भी सामने आए थे। तस्करी के इस मामले में वाराणसी, सोनभद्र और सहारनपुर के लोगों की संलिप्तता की बात भी सामने आई थी। प्रतिबंधित कफ सीरप को बिहार, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम के गुवाहाटी तक पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद नेटवर्क की व्यापकता पर सवाल उठे थे।
अब साहिबाबाद में 310 पेटियां मिलने के बाद फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि दूसरे राज्यों तक प्रतिबंधित सीरप पहुंचाने के लिए गाजियाबाद के गोदामों और फर्मों का इस्तेमाल कैसे हो रहा है। क्या इन गोदामों में रखे माल की आपूर्ति और दस्तावेजों की जांच प्रभावी तरीके से हो रही है? साथ ही, फर्मों की वास्तविक स्थिति और सीरप की खेप कहां भेजी जानी थी, इसकी पड़ताल भी अहम होगी।
11 महीने बाद भी मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल फरार
तीन नवंबर 2025 को मेरठ रोड के मछली गोदाम से पकड़े गए प्रतिबंधित कफ सीरप के मामले में मुख्य आरोपी बताए गए शुभम जायसवाल को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। वाराणसी, सोनभद्र और गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही है। इस बीच शुभम ने दुबई से वीडियो जारी कर खुद को बेकसूर बताया था। उसके वीडियो के बाद मामला चर्चा में आया था। वहीं, पुलिस ने सहारनपुर निवासी विशाल और विभोर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दोनों के मकान, दुकान और अन्य संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई भी की गई थी। बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से पुराने मामले की जांच और प्रतिबंधित कफ सीरप की तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह उजागर करने की कार्रवाई पर सवाल बने हुए हैं। साहिबाबाद में हाल में पकड़ी गई खेप की जांच से यह स्पष्ट होना अहम होगा कि इसका पुराने मामले से कोई संबंध है या यह अलग नेटवर्क का हिस्सा है।