हम बड़े लक्ष्य के बारे में सोचते हैं, एक बड़ी मीटिंग के लिए हम खुद तैयारी करते हैं, लेकिन हमारा ही कमरा बिखरा हुआ होता है। कमरा जितना बिखरा हुआ होता है उतना ही हमारा दिमाग भी बिखरा हुआ होता है।
हम बड़े लक्ष्य के बारे में सोचते हैं, एक बड़ी मीटिंग के लिए हम खुद तैयारी करते हैं, लेकिन हमारा ही कमरा बिखरा हुआ होता है। कमरा जितना बिखरा हुआ होता है उतना ही हमारा दिमाग भी बिखरा हुआ होता है। जो कमरे और थाली को व्यवस्थित करने के साथ अपने बैग को अच्छे से पैक करते हैं वह सब काम अच्छे से ही करते हैं। कुछ ऐसी ही बातों के साथ कथा वाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने लोगों को जीवन में एक सही राह दिखाई। मौका था पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में अमर उजाला द्वारा आयोजित जीवांजलि विचारों से बदलाव तक कार्यक्रम का। कार्यक्रम में उन्होंने आध्यात्म के साथ सकारात्मकता से जीवन में आने वाले बदलाव के बारे में लोगों को बताया।
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इस मौके पर ज्योतिषाचार्य पवन सिन्हा भी मौजूद रहे और उन्होंने लोगों को कहा कि हम सभी नदी की तरह हैं जिसे ब्रह्मांड रूपी समुद्र में मिलना है। अगर हम बहेंगे नहीं तो एक दिन नदी की जगह तालाब के मेंढक बन जाएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ की गई। कार्यक्रम में गाजियाबाद की मेयर सुनीता दयाल, सांसद अतुल गर्ग, सिटी मजिस्ट्रेट संतोष उपाध्याय मौजूद रहे।
जया किशोरी ने कहा नई पीढ़ी में कई बदलाव हुए हैं। इसमें हुए बदलाव के अनुसार चलना होगा। हम महिलाओं को आगे बढ़ाते हैं, जब वह सशक्त हो जाती हैं तो उनके साथ कैसे रहना है, यह भी नहीं सीखा। हम अभी भी उनकी पुराने विचारों के अनुसार तुलना कर रिश्ते को खराब करते हैं। मां का बेटा हो या पापा की परी दोनों में कुछ गलत नहीं है। सिर्फ गलत का साथ देना सही नहीं है। "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है" भजन के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया।