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Ghaziabad News: आवास विकास की भूमि पर अपने घर का सपना दिखाकर 20 करोड़ की धोखाधड़ी

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इंदिरापुरम। सहकारी अधिकारी (आवास) अरिमर्दन सिंह गौड़ की तहरीर पर वसुंधरा सेक्टर एक स्थित मै. सोलरीस इंफ्रा प्रोजेक्ट के मालिक और बिल्डर मृत्युंजय कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। दोनों पर आवास विकास के भूखंड को विकसित कर फ्लैट व मकान दिलाने के नाम पर लोगों से 19,90,80,000 रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। यह गबन सहकारी समिति बनाकर किया गया। समिति के सदस्यों को जब फ्लैट, मकान या उनकी निवेश की गई रकम नहीं मिली तब उन्होंने शिकायत की थी।
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अरिमर्दन सिंह गौड़ ने बताया कि सरकारी कर्मचारी पदमाकर त्रिपाठी ने सबसे पहले शिकायत की थी। जांच में सामने आया कि मैसर्स सोलरीस इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा.लि. के संचालक मृत्युंजय कुमार ने केंद्रीय सरकारी कर्मचारी सहकारी आवास समिति लि. के माध्यम से करीब 20 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। बिल्डर ने ग्रेटर नोएडा सेक्टर एक में आवास विकास की 10 एकड़ जमीन मांगी थी। एमओयू होने से पहले ही बिल्डर ने सहकारी समिति बनाकर सरकारी कर्मचारियों से रुपया लेना शुरु कर दिया और 7.85 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट में प्लाट और फ्लैट देने का झांसा देकर ऐंठ लिए। कुछ समय बाद ही बिल्डर ने प्रोजेक्ट को रद्द कर ढाई एकड़ जमीन मांगी। इस बार बिल्डर ने अपने साथ तीन अन्य बिल्डरों को भी शामिल किया।
इसके बाद सहकारी समिति तैयार कर प्लाट व फ्लैट का लालच देकर 6.30 करोड़ रुपए लोगों से जमा करवा लिए। रुपए लेने के बाद दोबारा प्रोजेक्ट रद्द कर दिया गया। साथ ही लोगों की रकम न तो सहकारी समिति में जमा कराई गई और न ही आवास विकास में। वर्ष 2008 से बिल्डर लोगों से रुपये ऐंठ कर गबन कर रहे थे। अरिमर्दन सिंह गौड़ ने बताया कि अभी तक की जांच में हड़पी गई रकम ब्याज समेत 19.90 करोड़ रुपए सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि आवास विकास की भूमि पर विदेश मंत्रालय के भी एक कर्मचारी ने निवेश किया था। उन्होंने ही सहकारी समिति का गठन किया था। बाद में इस समिति का निदेशक बिल्डर मृत्युंजय कुमार और सचिव सतेंद्र चंद्रा को बनाया गया था।
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लोगों से कही प्रोजेक्ट में बदलाव की बात
शिकायत करने वाले सुनील कुमार नौटिलाय ने बताया कि उनकी पत्नी टेलीकॉम विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्नी के नाम से प्लॉट की बुकिंग की थी। प्रोजेक्ट रद्द होने की बात पता चली तो उन्होंने बिल्डर से संपर्क किया। छानबीन करने पर बिल्डर ने प्रोजेक्ट रद्द होने की जगह उसमें बदलाव होने का हवाला दिया। साथ ही प्लॉट की जगह फ्लैट बनाकर देने की बात कही।
वर्जन
आवास विकास परिषद के सहकारी अधिकारी की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। विभाग की तरफ से दिए गए दस्तावेजों की जांच भी की जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अभिषेक श्रीवास्तव, एसीपी इंदिरापुरम
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