स्वाट टीम ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो खुद को नामचीन डॉक्टर बताकर शहर की मेडिकल फर्मेसी को फोन कर लाखों रुपये की दवाइयां मंगवाते थे। भुगतान के नाम पर वे फर्जी चेक देकर फरार हो जाते थे। इस ठगी के खेल में गिरोह ने करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। पुलिस ने इस मामले में चार बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके दो अन्य साथी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
पकड़े गए बदमाशों ने अपनी पहचान मुकेश तनेजा, अमित खुराना, दीप सिंह चुग और मुकेश आखरिया के रूप में बताई है। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे रोहतक, हरियाणा के निवासी हैं और इसी तरह की ठगी की वारदातों को अंजाम देते थे। गिरोह का तरीका काफी शातिर था, जिसमें वे पहले किसी फर्मेसी का नंबर प्राप्त करते और फिर डॉक्टर बनकर फोन करते। वे अलग-अलग बीमारियों का हवाला देकर महंगी दवाओं की आपूर्ति का ऑर्डर देते थे।
फर्जी चेकों से ठगी का तरीका
दवाइयां मिलने के बाद, गिरोह के सदस्य भुगतान के लिए फर्जी चेक देते थे। ये चेक किसी भी बैंक में भुनाए नहीं जा सकते थे, जिससे फर्मेसी मालिक को लाखों रुपये का नुकसान होता था। स्वाट टीम ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए इन चार बदमाशों को धर दबोचा। पुलिस का मानना है कि इनके फरार साथियों की गिरफ्तारी के बाद इस गिरोह द्वारा की गई अन्य वारदातों का भी खुलासा हो सकता है।
गिरोह का मकसद और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार बदमाशों ने पूछताछ में बताया कि वे इस पैसे का इस्तेमाल ऐशो-आराम की जिंदगी जीने के लिए करते थे। पुलिस उनसे बरामदगी और अन्य साथियों के ठिकानों के बारे में जानकारी जुटा रही है। इस गिरोह के पकड़े जाने से शहर के व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि ऐसे गिरोहों की वजह से व्यापार जगत में विश्वास का माहौल प्रभावित होता है। पुलिस इन बदमाशों के खिलाफ आगे की कार्रवाई कर रही है।