बुलंदशहर/जहांगीराबाद। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने जिला निवासी वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्मवीर सिंह अशोक को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर की गई। जिलाध्यक्ष रविन्द्र प्रधान ने जारी पत्र में अशोक पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार धर्मवीर सिंह अशोक लंबे समय से पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए थे और किसी अन्य दल में जाने की तैयारी कर रहे थे। चर्चाएं हैं कि वह जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सपा सांसद रामजीलाल सुमन से बातचीत भी हो चुकी है और वह अखिलेश यादव की प्रस्तावित मुजफ्फरनगर रैली में शामिल होकर औपचारिक रूप से सपा में प्रवेश कर सकते हैं।
धर्मवीर सिंह अशोक की पहचान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली दलित नेताओं में रही है। वह बसपा संस्थापक कांशीराम के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे और लंबे समय तक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे। वर्ष 1995 में बसपा सरकार बनने पर उन्हें एससी/एसटी आयोग का सदस्य बनाया गया था। इसके बाद वर्ष 2002 में दोबारा बसपा की सरकार आने पर उन्हें कारागार मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अशोक दो बार एमएलसी और दो बार जिले के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा संगठन में उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें कई राज्यों का प्रभारी भी बनाया था, जहां उन्होंने संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाई।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों से वह पार्टी में हाशिये पर चल रहे थे। न तो वह संगठनात्मक बैठकों में सक्रिय दिखे और न ही बड़े कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी रही। ऐसे में उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें लगातार लगाई जा रही थीं।
जैसे ही उनके सपा में जाने की चर्चाएं तेज हुईं, बसपा नेतृत्व ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कार्रवाई कर दी। पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता और विरोधी गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धर्मवीर सिंह अशोक के निष्कासन के बाद पश्चिमी यूपी की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। यदि वह सपा में शामिल होते हैं, तो क्षेत्र में सियासी समीकरणों पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है।