साहिबाबाद। हवा की खराब होती गुणवत्ता पर निगरानी बनाए रखने के लिए जनपद में पांच और एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यूपीपीसीबी की ओर से छह वायु गुणवत्ता मापक केंद्र स्थापित किए जाने की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद से क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन मापक केंद्र को स्थापित किए जाने के लिए सही स्थान चिह्नित करने के कार्य में जुट गया है।
दिल्ली एनसीआर ही नहीं देश में आए दिन टॉप-5 प्रदूषित शहरों में गाजियाबाद शामिल रहता है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि गाजियाबाद में वर्तमान में महज चार मापक केंद्र हैं जो नाकाफी हैं। क्षेत्र बड़ा होने और दिल्ली व नोएडा के बॉर्डर पर होने की वजह से आखिर हवा में किस ओर से धूल व धुएं के कण अधिक आ रहे हैं, इसकी उचित समीक्षा जरूरी है। बेहतर समीक्षा के बाद ही गुणवत्ता में सुधार के लिए योजनाएं तैयार की जा सकेंगी। ऐसे में हमने पांच और वायु गुणवत्ता सूचक यंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव दो माह पूर्व ही भेजा हुआ था जिस पर मुहर लग गई है।
इसमें एक मापक केंद्र लोनी, एक मोदीनगर तहसील, एक मुरादनगर ऑर्डिनेंस फैक्टरी के पास और दो गाजियाबाद सिटी के लोहिया नगर व राजनगर में लगाए जाएंगे। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि अभी इस योजना पर काम चल रहा है और मार्च 2026 से मापक केंद्र स्थापित किए जाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि गाजियाबाद के पांच केंद्रों के साथ ही यूपी में 18 नए केंद्र स्थापित होंगे, जिसके लिए करीब 36 करोड़ का बजट तैयार किया गया है। इसी के तहत पांच नए केंद्र गाजियाबाद को भी मिलेंगे।
वर्तमान में हैं चार केंद्र
वायु गुणवत्ता सूचकांक को मापने के लिए वर्तमान में गाजियाबाद में चार केंद्र हैं। इनमें एक इंदिरापुरम, एक वसुंधरा, एक संजयनगर एवं एक लोनी में स्थापित है।
एक मापक केंद्र अपने चारों ओर के दस किलोमीटर की वायु की गुणवत्ता को मापता है
वायु गुणवत्ता सूचकांक मापक केंद्र अपने चारों ओर करीब दस किमी की हवा की गुणवत्ता को परखता है और इस आधार पर एक्यूआई दर्शाता है। वर्तमान में चार केंद्र होने की वजह से पूरी तरह से हवा की परख नहीं हो पा रही। ऐसे में मापक यंत्र की संख्या बढ़ने से जनपद का सही एक्यूआई सामने आ सकेगा।