गाजियाबाद। शादी में पांच करोड़ खर्च करने के बाद भी रिश्ते में पांच महीने बाद ही दरार आ गई और पांच महीने बाद ही केस अदालत में पहुंच गया। युवती ने ससुर पर आरोप लगाया है कि वह बुरी नजर रखता था इसलिए तलाक की अर्जी लगाई है। तलाक की अर्जी में युवती ने यह भी कहा है कि अगर पति अलग रखना चाहे तो वह साथ रहने के लिए तैयार है। वहीं, पति ने परिवार से अलग रहने से इन्कार कर दिया है।
युवती के अधिवक्ता ने बताया कि लोहा कारोबारी ने अपनी इकलौती बेटी की शादी मेरठ के एक कारोबारी के बेटे से की थी। शादी में पांच करोड़ रुपये खर्च किया था। कारोबारी का परिवार दिल्ली के पॉश इलाके में रहता है। शादी के पांच महीने बाद ही लोहा कारोबारी की बेटी मायके आ गई और उसने अपनी मां से बताया कि ससुर उस पर बुरी नजर रखता है, इसलिए वह ससुराल नहीं जाना चाहती है। इसके बाद महिला ने तलाक की अर्जी लगा दी। अदालत में दो वर्ष से केस चल रहा है।
ननद बोलती थी काली नागिन, इसलिए मांगा तलाक
निजी कंपनी में इंजीनियर युवती ने बताया कि उसकी शादी गौतमबुद्धनगर के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से वर्ष 2019 में 45 लाख रुपये खर्च कर हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद ही लॉकडाउन लग गया। पति बंगलूरू में नौकरी करता था। वहीं पर लॉकडाउन में रह गया और युवती पति के बीमार मां की सेवा कर रही थी। इस दौरान आए दिन छोटी-छोटी बातों पर ननद ताने मारने लगी। वह युवती को काली नागिन, भद्दी, असभ्य बोलकर ताना मारती थी। आरोप लगाती थी कि वह उसकी बीमार मां का ध्यान नहीं रख पा रही है। इस बारे में पति से बात की, लेकिन पति ने ननद की भाषा पर कोई रोक नहीं लगाया। आए दिन ननद के ताने से तंग आकर युवती ने तलाक की अर्जी लगा दी।
पहले प्रताड़ना, अब उपेक्षा और ताना बन रहे तलाक के कारण
अधिवक्ता डॉ. राजकुमार चौहान का कहना है कि समाज में रिश्तों की परिभाषा तेजी से बदल रही है। जहां पहले घरेलू हिंसा और प्रताड़ना तलाक के प्रमुख कारण माने जाते थे। वहीं, अब उपेक्षा, ताना और मानसिक तनाव ने इनकी जगह ले ली है। बदलते सामाजिक परिवेश और व्यक्तिगत अपेक्षाओं में वृद्धि ने इस समस्या को और जटिल बना दिया है। तलाक के मामलों में उपेक्षा और तानों की शिकायत सामान्य हो गई है। कई महिलाएं अब यह स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं कि उन्हें अपने जीवनसाथी से भावनात्मक या मानसिक सहारा न मिले। वहीं, पुरुषों का कहना है कि उनकी मेहनत और योगदान को सराहा नहीं जाता, जिससे वे खुद को अनदेखा महसूस करते हैं।
बदलते सामाजिक मूल्य
परिवार न्यायालय के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एससी त्रिपाठी का कहना है कि आर्थिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत अधिकारों की जागरूकता और करियर की प्राथमिकता ने दंपत्तियों के बीच सामंजस्य बिठाना चुनौतीपूर्ण बना दिया है। पारिवारिक विवादों में अब शारीरिक प्रताड़ना से ज्यादा मानसिक दबाव और शब्दों की चोट प्रमुख भूमिका निभाने लगे हैं। समाज और परिवार की अपेक्षाएं भी तानों का कारण बन रही हैं।
वैवाहिक जीवन में संवाद और आपसी सम्मान जरूरी
मनोवैज्ञानिक डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि तलाक के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए वैवाहिक जीवन में संवाद और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। विवाह पूर्व परामर्श, मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान, और दंपतियों के लिए नियमित परामर्श इस समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं। रिश्तों की नींव को मजबूत बनाए रखने के लिए परिवार और समाज को इस ओर ध्यान देना होगा। उपेक्षा और तानों से उपजे विवादों को समय रहते सुलझाना ही तलाक के मामलों में कमी ला सकता है।