माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। सिहानी के नंदग्राम में बंजर भूमि को पहले तहसीलदार और एसडीएम ने नगर निगम की घोषित कर दी। इसके कुछ समय बाद उन्होंने ही इसी भूमि को किसान की बता दी। अब दोनों कागज को लेकर किसान और नगर निगम में ठन गई है।
महापौर सुनीता दयाल का कहना है कि नगर निगम की जिस भूमि को किसान की बताई गई है। वह अभिलेखों में भी नगर निगम के नाम ही है। कहां से क्या गड़बड़ी हुई है। इसके लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मामले की जांच करवाई जाएगी। अभी
नंदग्राम की उसी भूमि पर किसान द्वारा प्लाट काटकर बेचा जा रहा है। महापौर ने नगर निगम के अधिकारियों को कार्य रुकवाने और दोबारा भूमि पैमाइश का आदेश दिया है।
दरअसल, सिहानी के नंदग्राम में खसरा संख्या 36 में नगर निगम की लगभग 0.990 हेक्टेयर लगभग 10 बीघे भूमि है। इसपर नगर निगम के अधिकारियों द्वारा बोर्ड भी लगाया गया है, लेकिन इसी भूमि को कागजों में तहसील के कर्मचारियों ने किसान की बता दी। इसके बाद किसान द्वारा उक्त भूमि की मेड़बंदी भी कर दी गई। इसी भूमि में से कुछ हिस्से में किसान द्वारा निर्माण कार्य भी कराया
जा रहा है। इस संदर्भ में तहसीलदार रविकुमार सिंह ने बताया कि नगर निगम की भूमि को किसान के नाम दर्ज नहीं किया गया है। भूमि का चिह्नांकन न होने के कारण कागज को गलत रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है। नगर निगम के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर दोबारा पैमाइश के लिए पत्र लिखा जाएगा।
महापौर सुनीता दयाल ने अभी कुछ दिनों पहले ही नंदग्राम में नगर निगम की भूमि पर जाकर कब्जे को रुकवाया था। यहां नगर निगम की लगभग 100 बीघे भूमि पर प्लाट काटकर बेच दिया गया था। जिस महापौर ने नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिया है।
नगर निगम अपनी भूमि पर हुए कब्जे को खाली कराने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है। नगर निगम की ओर से क्रॉसिंग रिपब्लिक और डूडाहेड़ा में भी भूमि से कब्जा खाली कराया गया था। यहां नगर निगम की भूमि पर कच्चे मकान बनने के साथ ही खेती में भी प्रयोग किया जा रहा है।