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गाजियाबाद: रावण के पुतले में बारूद भरते समय पांच धमाके, पांच घायल; दो दीवारें गिरीं, आसपास के घरों में दरारें

Mon, 05 Oct 2026 10:09 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

हादसे के बाद सवाल यह है कि घनी आबादी के बीच सामुदायिक केंद्र में रावण बनाने और उसमें आतिशबाजी व बारूद के इस्तेमाल की जानकारी स्थानीय पुलिस, फायर विभाग और एलआईयू को थी या नहीं।
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रावण बनाने के दौरान फटे पटाखे वाले बम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रामलीला मैदान, शनि चौक के पीछे लाजपत नगर स्थित सामुदायिक केंद्र के बड़े हॉल में सोमवार सुबह रावण का पुतला तैयार करते समय एक के बाद एक पांच धमाके हो गए। धमाकों के बाद हॉल में आग लग गई और भवन की दो दीवारें गिर गईं। हादसे में ठेकेदार समेत पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को दिल्ली के जीटीबी और सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया है। धमाकों से आसपास के मकानों में भी दरारें आने की बात सामने आई है।

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फायर विभाग के मुताबिक, सुबह 9:26 बजे कंट्रोल रूम को रामलीला मैदान स्थित पटाखों की दुकान में आग लगने की सूचना मिली थी। सूचना पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी साहिबाबाद और साहिबाबाद फायर स्टेशन से तीन फायर टेंडर मौके पर भेजे गए। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि आग पटाखों की दुकान में नहीं, बल्कि सामुदायिक केंद्र के बड़े हॉल में लगी थी। फायर टीम ने आग पर काबू पाया।

बाद में जांच में सामने आया कि हॉल में पिछले दो-तीन दिनों से रावण का पुतला बनाने का काम चल रहा था। आरोप है कि पुतले में लगाए जाने वाले पटाखों के लिए बारूद भी वहीं लाया गया था। इसी दौरान सुबह करीब 9:20 बजे एक के बाद एक धमाके हुए। घायलों में ठेकेदार अनिल निवासी पिलखुवा, हापुड़ और उसका बेटा ऋषभ शामिल हैं। एक अन्य घायल की पहचान हरेंद्र के रूप में हुई है। दो अन्य घायलों की पहचान अभी नहीं हो सकी है।
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हादसे के बाद सवाल यह है कि घनी आबादी के बीच सामुदायिक केंद्र में रावण बनाने और उसमें आतिशबाजी व बारूद के इस्तेमाल की जानकारी स्थानीय पुलिस, फायर विभाग और एलआईयू को थी या नहीं। यदि जानकारी थी तो सुरक्षा इंतजाम और निगरानी क्यों नहीं की गई? और यदि जानकारी नहीं थी तो खुफिया एवं स्थानीय निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बारूद वहां कैसे पहुंचा और सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया था।

धमाकों से आसपास के मकानों में आईं दरारें
सामुदायिक केंद्र में हुए लगातार धमाकों का असर आसपास के मकानों तक पहुंचा। स्थानीय लोगों के मुताबिक तेज धमाकों के बाद आसपास स्थित कुछ घरों की दीवारों में दरारें आ गईं। इससे लोगों में दहशत फैल गई। आबादी के बीच बारूद और आतिशबाजी का इस्तेमाल किसकी अनुमति से और किन सुरक्षा इंतजामों के बीच किया जा रहा था, यह बड़ा सवाल है। हादसे के बाद पुलिस और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।

सभी घायलों को अस्पताल में भेज दिया गया है जहां उनका उपचार चल रहा है वही मामले की पूरी तरीके से जनता से जांच की जा रही है किसी भी दोषी को इस मसले में बक्सा नहीं जाएगा। -ऋजुल डीपीसी ट्रांस हिंडन

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