मुरादनगर। विद्युत निगम के 220 केवी उपकेंद्र मुरादनगर से वर्ष 2006 में सेवानिवृत्त हुए अवर अभियंता इंद्रपाल सिंह के जीपीएफ के 2.50 लाख रुपये के गबन के मामले में 25 साल बाद निगम ने कार्रवाई की है। विभागीय जांच में अनियमितता सामने आने के बाद आठ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। कार्रवाई से सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने की उम्मीद जगी है।
सेवानिवृत्त अवर अभियंता इंद्रपाल सिंह ने बताया कि वर्ष 2001 में उनके जीपीएफ खाते से 2.50 लाख रुपये निकाल लिए गए थे। इसकी जानकारी सेवानिवृत्ति के समय वर्ष 2006 में हुई। आरोप है कि विभागीय रिकॉर्ड में रकम का भुगतान नकद दिखाया गया, जबकि जीपीएफ की धनराशि का भुगतान चेक के माध्यम से किया जाना था। उनका कहना है कि अन्य कर्मचारियों को जीपीएफ की रकम चेक से दी गई, लेकिन उनके मामले में नकद भुगतान दर्शाया गया। इसके बाद से वह लगातार विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजकर मामले की जांच और धनराशि वापस दिलाने की मांग करते रहे। करीब 25 वर्ष बाद विभागीय अधिकारियों ने शिकायत का संज्ञान लेकर जांच समिति गठित की। समिति की जांच और संशोधित रिपोर्ट के आधार पर जीपीएफ में गड़बड़ी सामने आने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की गई।
एसीपी सुनील कुमार भारद्वाज ने बताया कि विद्युत पारेषण खंड मुरादनगर के अधिशासी अभियंता राहुल गुप्ता की तहरीर पर पुलिस ने वीके पुरी अधिशासी अभियंता, एनसी जैन खंडीय लेखाकार, डीपी सिंह अधिशासी अभियंता (ऑडिट), एसके सिंह उपखंड अधिकारी (ऑडिट), रविंद्र कुमार कैशियर, पंकज शर्मा उपखंड अधिकारी, मुनेश कुमार उपखंड क्लर्क और एसपी सिंह उपखंड अधिकारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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सेवानिवृत्त अवर अभियंता इंद्रपाल सिंह के मुताबिक, मामले में नामजद मुनेश कुमार के खिलाफ वर्ष 2009 में रिपोर्ट दर्ज हुई थी, वर्ष 2012 में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी और वह जेल भी गया था। वर्तमान में वह जमानत पर बाहर है।
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