पीड़ित कामयाब के अनुसार, वह वर्ष 2016 से सऊदी अरब में काम कर रहा है। उसकी बहन मनो बेगम और बहनोई उम्मेद अली (जो उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल है) ने उसे मसूरी के आकाश नगर गोविन्दपुरम इलाके में एक मकान दिलाने का झांसा दिया। पीड़ित ने 2017 से 2023 के बीच अपने और अपने दोस्तों (सिराजुद्दीन, अब्दुल गफ्फार, मोहम्मद जाईउल हक) के माध्यम से लगभग 50 लाख रुपये बहन-बहनोई के संयुक्त खाते में भेजे।
आरोपी बहनोई ने अपने छोटे बेटे सालिम की दिल्ली पुलिस में भर्ती के लिये मेडिकल परीक्षण के नाम पर 10 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की। पीड़ित ने अपना पैतृक मकान बेचकर और केरल के एक मित्र की मदद से 10 लाख की राशि भी चुकाई। पीड़ित का आरोप है कि जब लम्बे समय तक मकान नहीं मिला और उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उसे और उसके परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी।
पीड़ित का यह भी कहना है कि आरोपी पक्ष पुलिस विभाग में होने की धौंस दिखाकर उसे डरा-धमका रहा है। पीड़ित ने कई बार पुलिस को इनके खिलाफ शिकायत दी मगर कोई सुनवाई नहीं हुई, पीड़ित ने 15 जनवरी को पुलिस आयुक्त को भी शिकायती पत्र दिया था मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। तब पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तो एसीजेएम कोर्ट के आदेश पर उम्मेद अली (बहनोई), मनो बेगम (बहन) एवं नासिर व सालिम(भांजे) पुत्रगण उम्मेद अली, मौमीना पत्नी ईरशाद (बहन) व ईरशाद पुत्र यासीन(बहनोई) तथा भारू पुत्र अल्लाह नूर (भाई) निवासीगण शिवपुरम गोविन्दपुरम आकाश नगर मसूरी के खिलाफ लगभग 50 लाख रुपए मकान खरीदने के लिए तथा 10 लाख रुपए उधार लेकर धोखाधड़ी करने, मारपीट व गाली-गलौच तथा परिवार को जान से मारने की धमकी देने की एफआईआर दर्ज कराई है।
मामला पुलिस विभाग के कर्मचारियों से जुड़ा होने के कारण यह चर्चा का विषय बना हुआ है। एसीपी मसूरी लिपी नगायच ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जांच-पड़ताल करके वैधानिक कार्रवाई की जायेगी।