गाजियाबाद। ऋण की किश्त जमा करने के बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं देने पर जिला उपभोक्ता पारितोष आयोग ने क्षेत्रीय प्रबंधक वित्तीय निगम गाजियाबाद पर सेवा में कमी बताकर 55 हजार रुपये अर्थदंड देने का आदेश दिया है। आयोग के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने आदेश में कहा है कि अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करे और आदेश के 45 दिन के भीतर परिवाद व्यय का भुगतान करे।
आयोग से मिली जानकारी के अनुसार मुरादनगर के बसंतपुर सैंथली निवासी रामनाथ त्यागी ने आयोग में लगाई अर्जी में बताया था कि उन्होंने दो साझीदार ईश्वर देवी और पुष्पा के साथ मिलकर स्वरोजगार योजना में आजीविका कमाने के उद्देश्य से साझीदारी फर्म मेसर्स आईडी पैकेजिंग छपरौला दादरी में नालीदार डिब्बे बनाने के लिए स्थापित की थी। इसके बदले में 1057 वर्गगज भूमि बंधक रखकर अवधि ऋण (टर्म लोन) लिया था। फर्म के मूल विक्रय पत्र 22 जुलाई 1988 को क्षेत्रीय प्रबंधक वित्तीय निगम के पास जमानत के रूप में रखा था। वित्तीय निगम और दोनों साझीदार ईश्वर देवी व पुष्पा त्यागी के मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटार्नी) देवदत्त त्यागी ने अपनी ओर से मुख्तारनामा को दो सितंबर 2006 को खंडित करा लिया था। रजिस्टर्ड पत्र से देवदत्त त्यागी को सूचित भी करा दिया था। उसकी सूचना परिवादी ने विपक्षी को दे दी थी। 31 दिसंबर 2003 को परिवादी (वित्तीय निगम) और दोनों साझीदार ईश्वर देवी और पुष्पा त्यागी के बीच आपसी सहमति से एक रिटायरमेंट डीड लिखी गई थी, इससे साझीदारी फर्म विघटित होकर स्वामित्व फर्म में बदल गई थी। इसके बाद ऋण का भुगतान कर देने के बाद फर्म के ऋण संबंधित अनापत्ति प्रमाणपत्र की मांग की। मौखिक व बार-बार रजिस्टर्ड डाक से नोटिस भेजने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया।