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फाइलों की हुई लिस्टिंग, अब रैंडम ऑडिट करेगी कैग टीम

Thu, 13 Apr 2017 01:37 AM IST
अमर उजाला, गाजियाबाद
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गाजियाबाद - फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। सीएजी ऑडिट के लिए जीडीए में फाइलों की लिस्टिंग हो गई है। अब कैग की टीम इन फाइलों का रैंडम ऑडिट करेगी। ऑडिट टीम के मांगने पर जीडीए अफसरों को संबंधित पत्रावलियां उपलब्ध करानी होंगी।
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वहीं डिप्टी अकाउंटेंट जनरल बुधवार को जीडीए कार्यालय पहुंचीं और अफसरों के साथ मीटिंग की और सभी अनुभाग के अधिकारियों को ऑडिट के लिए फाइलों के स्मूद मूवमेंट के निर्देश दिए। कैग की टीम ने बुधवार को कुछ विभागों की फाइलों को मंगा लिया है। उन्होंने ऑडिट का काम शुरू कर दिया है।

सीएजी टीम ने ऑडिट के लिए सोमवार को ही जीडीए कार्यालय पहुंच गई थी। हालांकि सोमवार को सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की गई। सीएजी टीम ने सभी विभागों से वर्ष 2011-12 से मार्च 2017 तक हुए विभिन्न अनुभागों में हुए कार्यों की लिस्ट मांगी थी।
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बुधवार को जीडीए अधिकारियों ने सूची तैयार उपलब्ध भी करा दी। कैग की टीम इस लिस्ट में से किन्हीं भी छोटे-बड़े विकास कार्यों को चुनकर उनकी फाइलें मंगा सकेगी और उनका ऑडिट किया जाएगा।

जीडीए अधिकारियों ने संपत्ति, टाउन प्लानिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, उद्यान समेत तमाम विभागों की फाइलों की लिस्टिंग कराकर डाटा कैग टीम को उपलब्ध करा दिया है। जीडीए के प्रभारी वीसी रवींद्र गोडबोले ने बताया कि  मांगीं गई कई फाइलें ऑडिट टीम को उपलब्ध करा दी गई है।

जैसे-जैसे वह फाइलों की डिमांड करेंगे उन्हें उपलब्ध करा दी जाएंगी। दूसरी ओर, बुधवार को डिप्टी अकाउंटेंट जनरल हंसा मिश्रा जीडीए पहुंचीं। दोपहर तीन बजे उन्होंने जीडीए सभागार में फाइनेंस डिपार्टमेंट समेत सभी अनुभाग के अफसरों के साथ मीटिंग की।

जीडीए अधिकारियों के मुताबिक मीटिंग में ऑडिट के लिए मांगी जाने वाली फाइलों को तत्काल उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए। इन फाइलों के लेनदेन का पूरा रिकार्ड रखा जाएगा। कैग की टीम के साथ फाइलों को लाने ले जाने के लिए स्टाफ भी अटैच किया गया है।

टारगेट पर रहेंगे 2011 से 2017 के बीच हुए काम
कैग की टीम 2011-12 से 2017 के बीच हुए विकास कार्यों का ऑडिट करेगी। यानी उनका निशाना इन वर्षों में हुए कार्यों पर रहेगा। जीडीए सूत्रों के मुताबिक इस कार्यावधि में जीडीए ने मोहन नगर चौराहे को सिग्नल फ्री बनाने के लिए करीब 10 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन चौराहा सिग्नल फ्री नहीं हो पाया।

जीडीए के कामकाज को आनलाइन किए जाने पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए। कई विकास कार्यों की जगह में परिवर्तन कर दूसरे स्थानो पर डेवलपमेंट करा दिया गया। नगर निगम की जमीनों का पुनर्ग्रहण कर बिल्डरों को सौंपने के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।

वर्ष 2012 में कमीशन के चक्कर में 90 करोड़ का बिजली का सामान खरीद कर डाल दिया गया। अनियमितताओं के चक्कर में पूर्व फाइनेंस कंट्रोलर सस्पेंड भी हो चुके हैं। वहीं इंदिरापुरम में अंडरग्राउंड बिजली केबल डालने के मामले में भी धांधली के आरोप लगे थे। सूत्रों की मानें तो एक दर्जन से ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट कैग के निशाने पर है। इन प्रोजेक्ट में जीडीए के तत्कालीन अफसर घेरे में आ सकते हैं।
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