संजय नगर स्थित फ्लाईओवर के नीचे बनी ग्रीन बेल्ट से उखड़े पौधे। संवाद
गाजियाबाद। गाजियाबाद में हर साल करीब 10 लाख पौधे लगाने के दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद जिले की हरियाली लगातार सिमट रही है। वन विभाग की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 से 2023 के बीच जिले का हरित क्षेत्र करीब पांच किलोमीटर घट गया। यह स्थिति पौधरोपण अभियानों की प्रभावशीलता और पौधों के संरक्षण पर सवाल खड़े करती है।
राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार किसी भी मैदानी क्षेत्र में पारिस्थितकी संतुलन बनाए रखने के लिए कुल भूभाग का 33 प्रतिशत हिस्सा वन आच्छादित होना चाहिए। इसके उलट गाजियाबाद में यह आंकड़ा महज 2.36 प्रतिशत है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में जिले का वन क्षेत्र करीब 26 वर्ग किलोमीटर था। वर्ष 2019 तक यह घटकर लगभग 25 वर्ग किलोमीटर रह गया। वर्ष 2023 के सर्वे में यह और सिकुड़कर 21.02 वर्ग किलोमीटर पर पहुंच गया। यह जिले के कुल 891.61 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का मात्र 2.36 प्रतिशत है।
जनपद में एक भी घना जंगल नहीं : इतने बड़े भूभाग के बावजूद जिले में एक भी घना जंगल नहीं है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार जिले में 7.90 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र कम घने वन और 13.12 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र खुले वन के रूप में दर्ज है।