गाजियाबाद। बजट पर किसानों की मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली है। भाकियू नेताओं ने किसान क्रेडिट कार्ड की राशि बढ़ने से किसान के कर्ज में डूबने का तर्क दिया। वहीं, दूसरे तबके ने किसान क्रेडिट कार्ड की राशि को तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख करने के फैंसले की सराहना की है। उनका कहना है कि इस फैसले से किसानों की दशा बदलेगी।
दलहन व तिलहन की पैदावार बढ़ाने की दिशा में सरकार का रूख भी किसानों को प्रभावित कर रहा है। जिस तरह से जिले में लगातार खेती का रकबा कम हो रहा है, उससे इस तरह की खेती को बढ़ावा मिलने से जिले की अलग पहचान बनने की उम्मीद बढ़ी है। मोदीनगर-मुरादनगर में बड़ी तादाद में किसान दलहन तिलहन की खेती को छोड़ चुके हैं। उनकों उन्नत किस्म की बीज सरकारी बीज भंडारों पर आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
भाकियू के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने बताया कि किसानों को कर्ज नहीं बल्कि अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने चाहिए। इसके लिए सरकार को कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। किसान क्रेडिट कार्ड की राशि बढ़ने से किसान और कर्जे में जाएगा। ऐसी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए कि किसान को कर्ज लेने की जरूरत ही न पड़े। खाद उर्वरक के दाम कम होने चाहिए।
भाकियू के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महासचिव टीनू चौधरी ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड की राशि बढ़ने से छोटे किसानों को कोई लाभ होने वाला नहीं है। बैंक जमीन के रकबे के हिसाब से लोन देता है। पांच लाख का ऋण उस किसान को मिलेगा, जिसके पास जमीन ज्यादा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छोटी जोत के किसान ज्यादा हैं। ऐसे में सरकार को जमीन के रकबे को ध्यान में रखकर बजट जारी करना चाहिए।
सदरपुर गांव निवासी किसान आशु चौधरी ने बताया कि दलहन तिलहन के मामले में आत्म निर्भरता की दिशा में उठाए गए कदम से किसान व समाज के हर वर्ग को लाभ होगा। इससे उनका परंपरागत खेती से मोह कम होगा और उनकी आय भी बढेगी। किसान क्रेडिट कार्ड की राशि बढ़ने से छोटे व मझोले किसानों की दशा में सुधार आएगा।
रईसपुर के किसान नेता राजबीर सिंह ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड पर एक फीसदी ब्याज किए जाने की उम्मीद थी, जो सरकार ने नहीं किया। सरकार को ऐसी नीति बनानी चाहिए, जिससे किसानों को लोन की जरूरत ही न पड़े। दलहन तिलहन की तरफ किसानों का रूझान तब होगा, जब किसानों को निशुल्क बीज व कीटनाशक मिलेगा। किसान सम्मान निधि की राशि नहीं बढ़ाई गई है।