गाजियाबाद। हिमालया वेलनेस कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर नकली दवा बेचने वाले गिरोह के तार कई राज्यों से जुड़े हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी मयंक अग्रवाल ने बोगस फर्म के जरिये जीएसटी नंबर लिया था। वह मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव भी रहा है। ऐसे में उसने जनपद हापुड़ से वर्ष 2025 में एक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी कराया। पुलिस उसके सात साथियों की तलाश में यूपी के विभिन्न जिलों के साथ ही हरियाणा के सोनीपत और उत्तराखंड में दबिश दे रही है।
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि गिरोह ऑनलाइन ऑर्डर बुक करता था। दवा की सप्लाई कुरियर के जरिये की जाती थी। आरोपियों ने गत वर्ष दिसंबर में अलीगढ़ के एक विक्रेता को लिव-52 दवा की आपूर्ति की थी। इसकी पैकेजिंग और गुणवत्ता में अंतर दिखने पर उसे शक हुआ।
विक्रेता ने इसकी सूचना कंपनी को दी। कंपनी के प्रतिनिधि ललित कुमार ने जांच कराई तो पता चला कि दवा नकली है। इसके बाद ललित कुमार ने मुरादनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें बताया गया कि एमपी ट्रेडिंग का प्रोपराइटर मयंक अग्रवाल नकली दवा बनाने के गिरोह को संचालित करता है।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने मुरादनगर के आदर्श कॉलोनी का फर्जी पता देकर जीएसटी नंबर हासिल किया था। भौतिक सत्यापन के दौरान उक्त पते पर कोई फर्म अस्तित्व में नहीं पाई गई।
आरोपियों के बैंक खातों से लाखों का लेनदेन
डीसीपी ने बताया कि गिरोह में 15 लोगों के नाम सामने आ चुके हैं। इनके पकड़े जाने पर अन्य लोगों की संलिप्तता भी उजागर होगी। बताया कि गिरोह सोनीपत की किसी कंपनी से नकली दवा मंगाता था। मयंक ने नवंबर 2025 में कंपनी को लाखों टेबलेट की आपूर्ति का ऑर्डर दिया था। वहां से लगभग 60 हजार टेबलेट लाकर खपाई जा चुकी थीं, जबकि 50 हजार टेबलेट शनिवार को पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपियों से बरामद की गईं। इस दौरान पकड़े गए पांचों आरोपियों मयंक अग्रवाल, अनूप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी के मोबाइल खंगाले जा रहे हैं। इनके बैंक खातों से लाखों रुपये का लेनदेन हुआ है। खातों को सीज कराकर मनी ट्रेल की जांच की जा रही है। जांच में सामने आया है कि मयंक और नितिन पार्टनर हैं।