हापुड़। नौतपा से पूर्व ही गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। शुक्रवार को भी आसमान से बरस रही आग और झुलसाने वाली धूप ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर के समय प्रमुख बाजारों, चौराहों और सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।
पिछले एक सप्ताह से भीषण गर्मी के चलते सबसे अधिक परेशानी दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, सफाई कर्मियों और राहगीरों को उठानी पड़ी। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को चक्कर आने, सिर दर्द और बेचैनी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को भी लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले, जबकि बाजारों में भी भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही। भीषण गर्मी और लू के कारण पशु-पक्षी भी बेहाल नजर आ रहे हैं। दोपहिया वाहन चालकों को लू के कारण सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
दिन का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि रात में न्यूनतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 12 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गर्म हवा ने लोगों को बेहाल कर दिया। मौसम के लगातार बढ़ते तेवरों के बीच अब लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि 25 मई से नौतपा शुरू होने जा रहा है। मान्यता के अनुसार नौतपा के नौ दिनों में सूर्य का प्रभाव सबसे अधिक रहता है और इसी दौरान भीषण गर्मी तथा लू का प्रकोप चरम पर पहुंच जाता है।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार का कहना है कि 25 मई से नौतपा शुरू होने वाला है। इसमें इन नौ दिनों में भीषण गर्मी पड़ती है। आने वाले दिनों में भी भीषण गर्मी के साथ लू का प्रकोप जारी रहेगा।
बेल और आलू बुखारे का शरबत पीएं
आयुर्वेदाचार्य डॉ. धंवंतरि त्यागी ने बताया कि गर्मी के मौसम में पूरी, पकौड़ी, पराठा आदि पकवानों का सेवन करने से बचें। घर का बना हल्का खाना खाएं। इसके साथ ही लू से बचाव के लिए आलू बुखारे का शरबत और बिना दूध वाला बेल का जूस पीएं। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में दही और मट्ठा का सेवन शरीर को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इनका सेवन भी कम करें।
पानी का अधिक करें सेवन-
सीएचसी के फिजिशियन डॉ अशरफ अली ने बताया कि सूती व ढीले कपड़े पहनें और अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीएं। दोपहर के समय तेज धूप और लू से बचने के लिए घर में ही रहें। खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूज का सेवन करें।