गाजियाबाद। सुबह बच्चों को स्कूल भेजने और पति के काम पर जाने के बाद घर में अकेली रह जाना। दिनभर घरेलू काम और मन की बात साझा करने के लिए किसी का न होना। पति से छोटी-छोटी बातों पर होने वाली अनबन और संवाद की कमी। शहर की कई गृहिणियों के लिए यह दिनचर्या अब मानसिक तनाव का कारण बन रही है। इस तरह की रोजाना 30 से 35 महिलाएं अस्पताल में पहुंच रही हैं।
तनाव बढ़ने पर महिलाएं इसे मानसिक परेशानी के बजाय शारीरिक बीमारी समझकर अस्पताल पहुंच रही हैं। शरीर में दर्द, भूख न लगना, कमजोरी और रक्तचाप कम होने जैसी शिकायतों के साथ आने वाली महिलाओं की सामान्य जांच में बीमारी नहीं मिलने पर चिकित्सक उन्हें मनोचिकित्सक से सलाह लेने की सलाह दे रहे हैं।
एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संतराम वर्मा ने बताया कि महिलाओं में लंबे समय तक रहने वाला तनाव कई बार शारीरिक लक्षणों के रूप में सामने आता है। लगातार चिंता और अकेलेपन से नींद, भूख और ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। शरीर में दर्द की शिकायत भी बढ़ सकती है। ऐसे में केवल दर्द की दवा लेने के बजाय तनाव की वजह पहचानना जरूरी है।
पति से अनबन बन रही तनाव की वजह
पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद, बातचीत की कमी और घरेलू जिम्मेदारियों को लेकर तनाव महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। समस्या लंबे समय तक बनी रहने पर चिड़चिड़ापन, बेचैनी और उदासी बढ़ सकती है।
घर खाली होते ही बढ़ता अकेलापन
वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि सुबह पति और बच्चों के घर से निकलने के बाद कई गृहिणियां घंटों अकेली रहती हैं। सामाजिक मेलजोल और बातचीत का दायरा सीमित होने पर यह एकाकीपन तनाव को बढ़ा सकता है। दिल्ली एनसीआर की महिलाओं पर 2025 में हुए एक अध्ययन में अकेलेपन और तनाव तथा समायोजन संबंधी परेशानियों के बीच संबंध पाया गया। अध्ययन में 130 महिलाओं को शामिल किया गया था।
मानसिक तनाव शरीर में दर्द बनकर उभर रहा
तनाव का असर केवल मानसिक स्थिति पर नहीं पड़ता। नींद खराब होना, भूख कम लगना, थकान और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। अस्पताल में शारीरिक जांच सामान्य आने के बाद चिकित्सक ऐसी महिलाओं को मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दे रहे हैं।
गृहिणियों में तनाव का जोखिम अधिक
महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन में गृहिणियों में कामकाजी महिलाओं की तुलना में तनाव और एंग्जायटी का स्तर अधिक पाया गया था। अध्ययन में गृहिणियों में तनाव की दर 37 प्रतिशत दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने सामाजिक गतिविधियों और घर से बाहर सक्रिय रहने को मानसिक स्वास्थ्य के लिए मददगार माना।
तनाव से रक्तचाप और भूख भी प्रभावित
लगातार तनाव शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकता है। इससे भूख में कमी, कमजोरी और रक्तचाप में बदलाव जैसी शिकायत हो सकती है। हालांकि ऐसे लक्षणों को केवल तनाव मानना उचित नहीं है। लगातार परेशानी होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
मनोचिकित्सक बोले
एमएमजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. साकेतनाथ तिवारी के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव कई बार शरीर के लक्षणों के रूप में सामने आता है। शरीर में दर्द, भूख न लगना, कमजोरी या नींद खराब होने की समस्या लगातार बनी रहे और सामान्य जांच में कोई स्पष्ट कारण नहीं मिले तो मानसिक तनाव की भी जांच करानी चाहिए।
साइकोलॉजिस्ट ने दी सामाजिक जुड़ाव की सलाह
एमएमजी अस्पताल के मनकक्ष की साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव के अनुसार, गृहिणियों को दिनभर घर तक सीमित रहने के बजाय अपनी दिनचर्या में सामाजिक संपर्क और पसंद की गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए। मन की बात परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना भी जरूरी है। परिवार को भी महिलाओं की भावनात्मक जरूरतों को समझते हुए उनसे संवाद बनाए रखना चाहिए।