गाजियाबाद। जनपद में पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) बनने का रास्ता अब लगभग बंद हो गया है। कम से कम चालू वित्तीय वर्ष में इनके लिए बजट नहीं मिल पाएगा।
बृहस्पतिवार को आयोजित जिला योजना की बैठक में नगर विकास मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सीएमओ के प्रस्तावों को पहले ही झटके में बजट न होने का हवाला देकर खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सरकार पर पहले से ही 50 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ है।
ऐसे में नए प्रोजेक्ट को पैसा नहीं दिया जा सकता। खासकर उन विभागों से जुड़े प्रोजेक्ट को बिल्कुल भी पैसा नहीं मिलेगा, जिनमें स्टाफ की कमी है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग को लेकर चर्चा हुई तो सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल में जिले के अंदर नए स्वास्थ्य केंद्रों का प्रस्ताव रखा था, जिस पर नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि आपके पास स्टाफ नहीं है।
ऐसे में खाली बिल्डिंग खड़े करने से क्या फायदा? इसी बीच उन्होंने कहा कि सभी विभाग यह जान ले कि अभी सरकार ऐसे विभागों को नए काम का पैसा देने की स्थिति में नहीं है जिनके पास स्टाफ नहीं है।
उन्होंने सरकार पर पड़े अतिरिक्त बोझ का हवाला देते हुए कहा था कि किसानों की कर्ज माफी और सातवें वेतनमान के लागू करने से 50 हजार करोड़ से अतिरिक्त का बोझ पड़ा है जिसमें 30 हजार से ऊपर की रकम कर्ज माफी पर खर्च हुई है।
इसी बीच सरकार ने फैसला लिया है कि कर्ज माफी का बोझ जनता पर नहीं डाला जाएगा। ऐसे में सरकार ने फैसला लिया है कि इस साल सिर्फ जरूर कामों को ही बजट दिया जाए। उधर, बजट की कमी के चले सरकार नई नियुक्तियां करने से भी बच रही है।
मानकों के हिसाब से स्वास्थ्य केंद्र की जरूरत
जनसंख्या के हिसाब से जनपद में कुल 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों होने चाहिए लेकिन सिर्फ 21 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। मानकों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने पहले फेज में पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का प्रस्ताव रखा था।
इन जगहों पर प्रस्तावित हैं स्वास्थ्य केंद्र
स्वास्थ्य विभाग ने जावली, जलालाबाद, भदौली, कलछीना और नाहली में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जबकि खोड़ा और फर्रुखनगर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भी प्रस्ताव रखा था, जिसमें दोनों सीएचसी के लिए सांसद वीके सिंह ने प्रस्ताव दिया था जिन पर सहमति बनने सकती है।
कैसे होगी स्टाफ की कमी पूरी
तीन वर्ष से कई भवन बनकर तैयार हैं लेकिन स्टाफ न होने के कारण संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इसमें संयुक्त जिला अस्पताल का 60 बेड का वार्ड, बर्न वार्ड, ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू, ब्लड स्टोरेज यूनिट में भी पूरा स्टाफ नहीं है।
स्टाफ की भारी कमी है, ऐसे में बैठक में नए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बजट देने के लिए मना कर दिया गया है। क्योंकि अभी सरकार नए प्रोजेक्ट को पैसा देने की स्थिति में भी नहीं है। - डॉ. अजेय अग्रवाल, सीएमओ