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शक्ति स्वरूपा: नौकरी के साथ घर की जिम्मेदारियां निभा रहीं महिलाएं

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गाजियाबाद। शारदीय नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना की जाती है। मां सिद्धिदात्री को संतुलन, धैर्य, ज्ञान और सिद्धि की देवी कहा जाता है। मान्यता है कि वे भक्तों को कार्यों में सफलता और जीवन में संतुलन बनाए रखने की शक्ति देती हैं। आज के आधुनिक दौर में शहर की कई कामकाजी महिलाएं मां के इसी स्वरूप को साकार कर रही हैं। ये महिलाएं सुबह से शाम तक दफ्तर में पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाती हैं और शाम को घर लौटकर मां, पत्नी, बहू और बेटी की भूमिका भी बखूबी संभालती हैं। दोहरी जिम्मेदारी और थकान के बावजूद न तो उनके चेहरे पर शिकन आती है और न ही वे कर्तव्यों से पीछे हटती हैं। नवरात्र के इस पावन अवसर पर ऐसी ही कुछ शक्ति स्वरूपा महिलाओं से बात की गई, जो प्रेरणा हैं।
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छोटी बच्ची को संभालने के साथ नौकरी कर रहीं कोमल
पटेल नगर निवासी कोमल पिछले तीन साल से शारदा उद्योग में कार्यरत हैं। उनकी तीन साल की छोटी बेटी है। कोमल ने बताया कि घर और ऑफिस दोनों संभालना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने संतुलन बना रखा है।

अकेले रहकर नौकरी कर रहीं प्रिंसी
मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली प्रिंसी गाजियाबाद में अकेले रहकर नौकरी कर रही हैं। पिता के न होने के कारण परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं पर है। वह अपना खर्च खुद उठाती हैं और घर के सारे काम भी स्वयं करती हैं।
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18 साल से निभा रहीं घर-ऑफिस की ड्यूटी
सिहानी गेट निवासी सुनीता जैन पिछले 18 साल से अकाउंट सेक्टर में नौकरी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि घर को आर्थिक सहारा देने के लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं। थक कर लौटने के बाद भी रसोई की जिम्मेदारी निभाती हैं।

बच्चे और नौकरी, दोनों में संतुलन
पटेल नगर निवासी शैली पिछले 12 साल से एक ज्वेलरी शोरूम में काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि बच्चे छोटे थे तब भी उन्होंने नौकरी नहीं छोड़ी और दोनों जिम्मेदारियों को बराबर महत्व दिया।
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