यूपी गेट से राजनगर एक्सटेंशन तक निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के लिए जीडीए को एन्वायरमेंट क्लीयरेंस लेना होगा। एनजीटी ने सोमवार को पक्षी विहार से संबंधित केस में सुनवाई के दौरान जीडीए को यह डायरेक्शन दिए। एनजीटी ने पक्षी विहार की जमीन पर आने वाले मोहन मीकिंस इंडस्ट्रीज के ड्रेनेज को भी तीन सप्ताह में बंद कर पाइप हटाने के आदेश दिए।
कड़कड़ मॉडल गांव निवासी सुशील राघव ने पक्षी विहार की जमीन को खाली कराने के संबंध में एनजीटी में याचिका दाखिल की हुई है। सोमवार को इस मामले में एनजीटी में सुनवाई हुई।
करीब ढाई घंटे चली बहस के दौरान एनजीटी ने पक्षी विहार की जमीन पर आ रहे गंदे पानी पर नाराजगी जताई। प्रतिवादी पक्ष ने दावा किया गया कि मोहन मीकिंस से निकल रहे ड्रेनेज पाइप में अब गंदा पानी नहीं आ रहा। इस पर एनजीटी ने उन पुराने पाइप को भी तीन सप्ताह में हटाकर अवगत कराने के आदेश दिए।
पक्षी विहार की जमीन पर एलिवेटेड रोड के करीब 7-8 पिलर बन रहे हैं।
याचिकाकर्ता सुशील राघव के एडवोकेट राहुल चौधरी ने बताया कि कोर्ट ने इनके निर्माण पर रोक तो नहीं लगाई, लेकिन जीडीए और वन विभाग से पूछा कि क्या इसके लिए उन्होंने एन्वायरमेंट क्लीयरेंस ली है।
परतिवादी पक्ष के इंकार करने पर एनजीटी ने इसके लिए एन्वायरमेंट क्लीयरेंस जरूरी बताया। ऐसे में अब जीडीए को एलिवेटेड रोड के लिए एन्वायरमेंट क्लीयरेंस लेना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि बुधवार को इस मामले में फिर सुनवाई होगी।