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Ghaziabad News: दिन में रेकी कर रात में मोबाइल टावर से आरआरयू चुराने वाले गिरोह के आठ गिरफ्तार

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ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर कोतवाली पुलिस ने सीआरटी-स्वॉट-2 टीम के साथ संयुक्त अभियान में शुक्रवार को मोबाइल टावर से रेडियो रिसीवर यूनिट (आरआरयू) चुराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने सगरना अब्बास मलिक उर्फ बाशू (57) समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सलीम मलिक (38), सलीम के भाई शानू मलिक (40), इमरान मलिक (23), सलमान कुरैशी (25), शानू (37), बागपत निवासी सुहैल कुरैशी (25) और मुजफ्फरनगर निवासी शहनवाज उर्फ सोनू (32) के रूप में हुई है। आरोपियों के कब्जे से 35 रेडियो रिसीवर यूनिट (आरआरयू), 4850 रुपये नकद, वैगनआर कार सहित चोरी में प्रयुक्त औजार बरामद किए हैं। बरामद माल की अनुमानित कीमत 3.5 करोड़ रुपये है। गिरोह से आरआरयू खरीदने वाले गाजियाबाद निवासी रिजवान मलिक और आरिफ फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
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डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी के मुताबिक गिरोह करीब एक वर्ष से राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, नोएडा सहित एनसीआर क्षेत्र में मोबाइल टावरों से रेडियो रिसीवर यूनिट, बैटरियां व अन्य उपकरण चोरी कर रहा था। आरोपी दिन में टावरों की रेकी कर रात या तड़के चोरी को अंजाम देते थे। गिरोह ने आरोपियों को काम बांट रखे थे। सुहैल कुरैशी, शहनवाज, शानू मलिक, शानू और इमरान मलिक टावरों से आरआरयू व बैटरियां चुराते थे। वहीं, सलमान कुरैशी वारदात के दौरान गाड़ी लेकर साथ चलता था। जबकि सलीम मलिक और अब्बास मलिक गिरोह की रेकी व आर्थिक सहायता का जिम्मा संभालते थे। चोरी के माल की बिक्री दिल्ली और मुरादनगर में की जाती थी। अब्बास मलिक चोरी के माल को आगे गाजियाबाद और दिल्ली में बेचता था। आरोपी अबतक 35 से अधिक टॉवरों से आरआरयू चोरी कर चुके हैं। गिरोह का पर्दाफाश करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया है।


आठवीं तक ही पढ़े हैं सभी आरोपी, लगेगा गैंगस्टर एक्ट
आरोपी सलीम, अब्बास मलिक, शहनवाज उर्फ सोनू आठवीं पास हैं। जबकि सुहैल कुरैशी इमरान मलिक, सलमान कुरैशी सातवीं पास हैं। शानू मलिक छठवीं व शानू दूसरी तक पढ़ा है। गिरोह में शामिल सभी आरोपी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं। इन पर हत्या के प्रयास, हथियार अधिनियम और चोरी के मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पकड़े गए बदमाशों पर गैंगस्टर एक्ट की तहत कार्रवाई की जाएगी।
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जल्द अमीर बनने की चाहत ने पहुंचाया जेल
गिरोह के आरोपी 15 से 20 हजार रुपये सलीम व अब्बास को आरआरयू बेचते थे। वहीं अब्बास और सलीम वांछित आरोपी रिजवान मलिक और आरिफ को 40 से 50 हजार रुपये में आरआरयू बेचते थे। गाजियाबाद के रिजवान मलिक और आरिफ आरआरयू को दिल्ली में ढाई से तीन लाख में बेचते थे। मामले में रिजवान मलिक के भाई को भी गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपी जल्द पैसे कमाने के चलते वारदात करने लगे। आरोपी पकड़े जाने के डर से लगातार स्थान बदलते रहते थे। आरोपी आपस में बातचीत के लिए व्हाट्सएप कॉल का प्रयोग करते थे।

टेलीकॉम अधिकारियों की मिलीभगत की हो रही जांच

पुलिस अधिकारी टेलीकॉम कंपनी कर्मचारियों की मिलीभगत की जांच कर रहे हैं। मोबाइल टावर में लगे आरआरयू की कीमत पांच लाख से अधिक होती है। जिले में अब तक जितने गिरोह पकड़े गए हैं उनसभी ने चोरी के आरआरयू को कम कीमत पर दिल्ली में कबाड़ियों को बेचने की बात कही है। पुलिस ऐसे कबाड़ियों को पकड़ने के प्रयास में भी है ताकि पता चल सके कि आरआरयू का इस्तेमाल कहां होता था। फिलहाल आरआरयू के दिल्ली से होते हुए चीन भेजे जाने की जानकारी मिली है। हालांकि पुलिस अधिकारी आरआरयू के चीन भेजे जाने की बात पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।
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