अर्थला झील पर अवैध कब्जे, उसमें सीवर डिस्चार्ज और सॉलिड वेस्ट डाले जाने की शिकायत पर एनजीटी ने सख्ती की है। एनजीटी ने यूपी सरकार, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, गाजियाबाद नगर निगम, जीडीए, डीएम और एसएसपी समेत आठ विभागों को नोटिस जारी किए हैं। सभी को 25 अक्तूबर तक जवाब दाखिल करना है।
गाजियाबाद की सामाजिक संस्था सोसायटी फॉर प्रोटेक्शन इंवायरमेंट एंड बायोडायवर्सिटी के संयोजक आकाश वशिष्ठ और कड़कड़ मॉडल निवासी नरेंद्र कुमार की ओर से अर्थला झील की दुर्दशा पर एनजीटी में जनहित याचिका दाखिल की गई है।
उन्होंने याचिका में ट्रिब्युनल को अवगत कराया कि अवैध कब्जे की वजह से झील का क्षेत्रफल करीब ढाई लाख वर्ग मीटर से घटकर सवा लाख वर्ग मीटर रह गया है। इसमें पास की कई कालोनियों का सीवर डिस्चार्ज, इंडस्ट्रियल डिस्चार्ज और कूड़ा डाला जा रहा है।
जल के प्राकृतिक श्रोत को खत्म किया जा रहा है। इसमें अवैध कब्जे के लिए याचिकाकर्ताओं ने एसएसपी और साहिबाबाद थाने के एसएचओ को भी पार्टी बनाया है। याचिकाकर्ता की अधिवक्ता अंतिमा ए बजाज ने बताया कि इस मामले में एनजीटी ने यूपी सरकार, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, नगर निगम, जीडीए, डीएम, एसएसपी, साहिबाबाद एसएसचओ और उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अब 25 अक्तूबर को इस मामले में सुनवाई होगी।