गाजियाबाद। घरेलू रसोई का बजट एक बार फिर महंगाई की आंच में तपने लगा है। सरसों, सोयाबीन, रिफाइंड और पाम ऑयल समेत अधिकांश खाद्य तेलों के दाम पिछले कुछ दिनों में 15 से 20 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। थोक बाजार में बढ़ती कीमतों का असर अब खुदरा बाजारों में भी साफ दिखाई देने लगा है। व्यापारियों का कहना है कि जून तक तेलों के दामों में और वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है।
खाद्य तेल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष गौरव का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, आयात लागत बढ़ने और डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ा है। यही वजह है कि तेल कंपनियों ने लगातार दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। परिवहन लागत बढ़ने से प्रति किलो पर लगभग एक रुपये अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
होली के आसपास रिफाइंड का दाम 141-142 रुपये प्रति किलो था। अब 161-162 रुपये पहुंच चुका है। वहीं सरसों के तेल की कीमत 145 रुपये प्रति किलो थी जो अब 165 रुपये तक पहुंच गई है। यही हाल रहा तो जून तक दामों में और बढ़ोतरी हो सकती है। स्थानीय बाजारों में सरसों तेल, रिफाइंड और सोयाबीन तेल के दामों में अचानक उछाल आने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर माल ढुलाई पर पड़ा है। पहले जहां एक ट्रक पर आने वाला खर्च सीमित था, वहीं अब लंबी दूरी की ढुलाई महंगी हो गई है। इसका असर छोटे दुकानदारों और ग्राहक दोनों पर पड़ रहा है।
व्यापारी नेता देवेंद्र हितकारी का कहना है कि बीते एक महीने में कई कंपनियों ने अलग-अलग चरणों में कीमतें बढ़ाई हैं। थोक मंडियों में आवक सामान्य होने के बावजूद लागत बढ़ने से राहत नहीं मिल रही। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे पाम ऑयल और सोयाबीन तेल की कीमतों में नरमी नहीं आई तो अगले महीने तक खुदरा बाजार में और बढ़ोतरी हो सकती है।
गृहिणियों ने कहा कि बिगड़ा रसोई का बजट
गोविंदपुरम निवासी गृहिणी सीमा का कहना है कि पहले से ही दाल, सब्जी और गैस सिलिंडर महंगे हैं, अब खाद्य तेलों की कीमत बढ़ने से रसोई संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
पहले दो से ढाई हजार में चल जाती थी रसोई, अब चार तक पहुंच रहा बजट
शास्त्री नगर निवासी गृहिणी कविता कहती हैं कि पहले दो से ढाई हजार रुपये में रसोई का बजट लगता था अब 3500 से लेकर 4000 तक हो रहा खर्च। गैस से लेकर तेल और अन्य खाद्य पदार्थ महंगा होने से बजट हिला हुआ है।
आम आदमी की थाली पर असर
खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से होटल, ढाबा और मिठाई कारोबार भी प्रभावित होने लगा है। कई छोटे रेस्टोरेंट संचालकों ने खाने की कीमतें बढ़ाने के संकेत दिए हैं। वहीं, परिवारों ने तेल की खपत कम करने की शुरुआत कर दी है। खाद्य तेलों के दामों में वृद्धि से समोसा, ब्रेड पकौड़ा, पूरी, सब्जी खाद्य तेलों से तैयार होने वाले अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत पांच से 10 रुपये तक बढ़ गई है।